भारत के एक जिले को 220000 H-1B वीजा... अमेरिकी अर्थशास्त्री ने भारतीय वीजा कैप पर लगाया फ्रॉड का आरोप, जानें क्या कहा

Updated on 26-11-2025 01:56 PM
वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व हाउस प्रतिनिधि और अर्थशास्त्री डेव ब्रैट ने H-1B वीजा प्रोग्राम को लेकर भारत पर निशाना साधा और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के एक जिले को 220,000 H-1B वीजा मिले जो उसकी राष्ट्रीय सीमा से 2.5 गुना ज्यादा है। ब्रैट ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा पर अपनी कार्रवाई तेज कर रहा है। एक पॉडकॉस्ट पर उन्होंने कहा कि एच-1बी वीजा सिस्टम इंडस्ट्रियल स्तर के फ्रॉड में फंस गया है। ब्रैट ने कहा जब आप H-1B सुनते हैं तो अपने परिवार के बारे में सोचें, क्योंकि इन फ्रॉड वीजा ने उनका भविष्य चुरा लिया है।

चेन्नई को लेकर ब्रैट ने किया दावा

अमेरिका की प्रतिनिधि सभा के पूर्व सदस्य डॉ. डेव ब्रैट ने कहा कि भारत से वीजा का आवंटन उस स्तर तक पहुंच गया है जो कानूनी सीमाओं को पार कर गया है। स्टीव बैनन के पॉडकास्ट पर ब्रैट ने कहा, '71 प्रतिशत H-1B वीजा भारत से आता है, और चीन से सिर्फ 12 प्रतिशत। इससे पता चलता है कि वहां कुछ चल रहा है। सिर्फ 85000 H-1B वीजा की सीमा है, फिर भी किसी तरह भारत के एक जिले मद्रास (चेन्नई) को 220000 (वीजा) मिल गया। यह कांग्रेस की तय सीमा सा 2.5 गुना ज्यादा है। तो यही धोखाधड़ी है।'

अमेरिकी कामगारों के लिए बताया खतरा

ब्रैट ने इसे अमेरिकी कामगारों के लिए सीधे खतरा बताया और कहा, 'जब इनमें से कोई एक आकर दावा करता है कि वे स्किल्ड नहीं हैं, तो यही फ्रॉड है। वे नहीं हैं। वे आपके परिवार की नौकरी, आपका मॉर्गेज, आपका घर, यह सब छीन रहे हैं।' रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेड ने साल 2024 में लगभग 220,000 एच-1बी वीजा और 140,000 H-4 डिपेंडेंटेस वीजा जारी किए हैं। कॉन्सुलेट चार बड़े इलाकों, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना के लिए वीजा आवेदन हैंडल करता है।

अमेरिकी राजनयिक का चेन्नई को लेकर दावा

अमेरिकी अर्थशास्त्री ब्रैट ने भारतीय मूल की अमेरिकी विदेश सेवा अधिकारी महवश सिद्दीकी के पहले लगाए आरोपों का हवाला दिया। सिद्दीकी ने 2005-2007 तक चेन्नई कॉन्सुलेट में काम किया था। उन्होंने एक इंटरव्यू में चौंकाने वाला दावा किया और कहा कि भारत से आने वाले 80-90 प्रतिशत H-1B वीजा नकली डॉक्यूमेंट्स से भरे होते हैं। महवश ने कहा कि उन्होंने 2006 और 2007 के बीच कम से कम 51,000 नॉन इमिग्रेंट वीजा पर फैसला सुनाया।
महवश ने हैदराबाद को एक खॉस स्पॉट बताया जहां अमीरपेट इलाके में दुकानें थीं जो आवेदकों को न सिर्फ वीजा के लिए कोचिंग देती थीं, बल्कि नकली डिग्री और डॉक्यूमेंट्स या शादी के दस्तावेज भी दे रही थीं। सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें और उनकी टीम को फ्रॉड का पैटर्न जल्दी पता चल गया और प्रशासन को इसकी जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि उनकी कोशिशों का विरोध हुआ और राजनीतिक दबाव होने की बात कही। उनके अभियान को 'रोग ऑपरेशन' कहकर खारिज कर दिया गया।

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