
किम्मल बाई उर्फ मुमताज बी ने एससी-एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कराया था। इसके विरुद्ध याचिकाकर्ता सुशांत पुरोहित की ओर से हाई कोर्ट में कहा गया था कि मतांतरण करके हुसैन कादरी से विवाह किया था और नाम परिवर्तित करके मुमताज बी कर लिया। इस आधार पर वह अपने आदिवासी होने का अधिकार खो चुकी है।
हाई कोर्ट ने इस तर्क को सही माना और एट्रोसिटी एक्ट के प्रकरण पर रोक लगा दी थी। उधर, 30 जनवरी 2025 को इंदौर में मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने आदिवासी समाज में हो रहे मतांतरण को लेकर कहा था कि डीलिस्टिंग जल्द से जल्द लागू होना चाहिए। एक व्यक्ति आदिवासी समाज छोड़कर दूसरे समाज में चला जाता है। उसे जो लाभ मिलता है, उसे तत्काल खत्म कर देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एससी-एसटी एक्ट (Supreme Court on SC/ST Act)से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता।
जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने के साथ ही अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत और पूरी तरह समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि यह नियम बिना किसी अपवाद के लागू होता है।