
अब खंती में नहीं सड़ेगा खाना
एएचओ रविकांत के इस नवाचार की निगमायुक्त हरेंद्र नारायन ने सराहना की है। खास बात यह है कि इस पहल से खाने का सदुपयोग होगा । सूखे कचरे के साथ जो लोग गिला कचरा देते थे, उसमें भी कमी आएगी। इस तरह का खाना खंती में जाकर सिर्फ सड़ता था। इस नवाचार से खाना अब सड़ेगा नहीं, बल्कि खाने का सदुपयोग होगा। वैसे भी घरों से एकत्र किए जाने वाले कचरे का कलेक्शन दोपहर 12 बजे तक हो जाता है। इसलिए घरों से एकत्र किए जाने वाली रोटी और ब्रेड को समय रहते गौशाला या कांजी हाउस तक पहुंचाया जाएगा।
सातवें बिन के नाम से जाना जाएगा
स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस नवाचार को लिया जा रहा है। निगमायुक्त हरेंद्र नारायन इस नवाचार की सराहना की है। वह जल्द ही अधिकारी रूप से इस नवाचार को शहर की सभी कचरा गाड़ियों में सातवें बिन के नाम से सामने लाएंगे। अभी जोन एक के वार्ड तीन, चार और पांच की क्षेत्रों से रोटी और ब्रेड को एकत्र किया जा रहा है। इन वार्डों के तहत यह काम बैरागढ़, सीहोर रोड कोलू खेड़ी और भौंरी क्षेत्र में लोग इस बिन में खाना का सामना दे रहे हैं।
अभी लगे हैं कचरा गाड़ियों में छह बिन
शहर में जिन कचरा गाड़ियों से विभिन्न तरह का कचरा एकत्र किया जा रहा है। उनमें फिलहाल छह बिन लगे हुए हैं। नीला बिन - सूखे कचरे के लिए, हरा बिन - गिला कचरे के लिए, काला बिन - कांच व ट्यूब लाइट, पीला बिन - सैनिटरी पैड, भुरा बिन - ई वेस्ट के लिए, लाल बिन - मेडिकल वेस्ट के लिए लगाया गया है। यह सातवा बाल्टी नुमा बिन शहर की कचरा गाड़ियों में खाने की चीजों के लिए लगाया जाएगा।