
मौके से दो AK-47, एक रिवॉल्वर और एक पिस्तौल बरामद की गई है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि AK-47 हिड़मा की ही रही होगी, क्योंकि वह हमेशा इसी हथियार से लैस रहता था।
कौन था माड़वी हिड़मा?
हिड़मा बस्तर में नक्सल आतंक का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता था। इसका असली नाम संतोष उर्फ इंदमुल उर्फ पोडियाम भीमा था। उसका जन्म सुकमा के पूवर्ती गांव में हुआ था। वह वर्ष 1990 में नक्सल संगठन से जुड़ा और 13 साल की उम्र में ही टॉप कमेटी में शामिल कर लिया गया। बताया जाता है कि वह केवल 10वीं तक शिक्षित था और हमेशा अपने साथ एक नोटबुक रखता था।
बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड:
2010 का ताड़मेटला हमला – CRPF के 76 जवान शहीद
2013 का झीरम घाटी हमला – कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शहीद
2017 का बुरकापाल हमला – CRPF के 25 जवान शहीद
हिड़मा ने फिलीपींस में गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग भी ली थी।
हिड़मा के गढ़ में फोर्स का दबदबा
हाल ही में हिड़मा के गांव से लगे इलाकों—मुलेर, परिया, टेकलगुडेम, पूवर्ती, सलातोंग, पुलनपाड़ समेत कई दुर्गम क्षेत्रों में नए पुलिस कैंप खोले गए हैं। इससे नक्सलियों की आवाजाही सीमित हुई, संगठन की सप्लाई लाइन कमजोर पड़ी और ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना बढ़ी।
बस्तर में चल रहे इस बड़े अभियान ने नक्सली नेटवर्क को पीछे ढकेल दिया है। गोल्लाकुंडा जैसे इलाकों में कैंप खुलने से बीजापुर-सुकमा के भीतरू क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की पकड़ और मजबूत हुई है।
मुठभेड़ में ढेर नक्सलियों की सूची
हिड़मा – सीसी सदस्य
मदगाम राजे – हिड़मा की पत्नी, SZCM
लकमल – DCM सदस्य
कमलू – PPCM सदस्य
मल्ला – PPCM सदस्य
देवे – हिड़मा का रक्षक