यूरोफाइटर की ना संख्या, ना रफ्तार आएगी काम... भारत के एक अग्नि-5 मिसाइल से हो कैसे जाएगा बांग्लादेश का काम तमाम?

Updated on 13-12-2025 01:27 PM
ढाका: बांग्लादेश से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश एयरफोर्स 12 से 16 यूरोफाइटर टाइफून खरीदने में दिलचस्पी दिखा रही है। पहले बांग्लादेश, चीनी J-10C लड़ाकू विमान खरीदने के लिए बात कर रही थी। लेकिन बांग्लादेश को बाद में अहसास हो गया कि राफेल को लेकर चीन झूठ बोल रहा है और उसकी जरूरतों पर जे-10सी खरा नहीं उतरता है। बांग्लादेश जान गया कि भारतीय राफेल से चीनी J-10C मुकाबला नहीं कर सकता है, इसीलिए अब वो राफेल के बराबर की क्षमता रखने वालेल यूरोफाइटर टायफून खरीदने को लेकर बात कर रहा है। अगर ये डील फाइनल हो जाती है तो बांग्लादेश, यूरोफाइटर ऑपरेट करने वाला 11वां देश बन जाएगा।

आपको बता दें कि यूरोफाइटर टायफून को इटली, स्पेन, UK और जर्मनी मिलकर बनाते हैं और ये एक 4.5-जेनरेशन फाइटर जेट है। खास बात यह है कि बांग्लादेश, यूरोफाइटर टाइफून को ऑपरेट करने वाला पहला दक्षिण एशियाई देश होगा, साथ ही यूरोप और मिडिल ईस्ट के बाहर ऐसा करने वाला पहला देश भी होगा। चीन के लिए ये एक बड़ा झटका इसलिए भी है क्योंकि उसने मई संघर्ष के बाद राफेल को लेकर काफी झूठ फैलाया था और जे-10सी जेट के खिलाफ प्रोपेगेंडा किया था, लेकिन एक भी ग्राहक नहीं मिल पाया।

बांग्लादेश के लिए एक अग्नि-5 मिसाइल काफी
वहीं, दक्षिण एशिया में बदलते सामरिक संतुलन के बीच भारत की अग्नि-5 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को लेकर एक अहम रणनीतिक चर्चा भी सामने आ रही है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि अग्नि-5 जैसी एक ही लंबी दूरी की मिसाइल किसी भी पारंपरिक लड़ाकू बेड़े की प्रभावशीलता को खत्म करने के लिए काफी है। खासतौर पर अगर बांग्लादेश जैसे देश के पास भविष्य में 16 यूरोफाइटर टाइफून जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी हों, तब भी वे अग्नि-5 जैसी प्रणाली के सामने रणनीतिक रूप से बेअसर साबित होते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह अग्नि-5 की 5,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता है, जो पूरे क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों, एयरबेस और कमांड सेंटर्स को अपनी जद में ले आती है।हालांकि यूरोफाइटर और अग्नि-5 मिसाइल... दोनों की भूमिकाएं अलग अलग हैं। यूरोफाइटर एक टैक्टिकल एयर कॉम्बैट प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल हवाई लड़ाई, ग्राउंड अटैक और सीमित ऑपरेशनों के लिए किया जाता है। वहीं अग्नि-5 एक रणनीतिक हथियार है, जिसे परमाणु क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है और जिसका मकसद युद्ध लड़ना नहीं, बल्कि युद्ध को खत्म करना है। यही वजह है कि बांग्लादेश संख्या के हिसाब से भले ही कितने भी 16 फाइटर जेट क्यों ना खरीद ले, वो भारत पर प्रेशर नहीं बना सकता। भारत की एक बैलिस्टिक मिसाइल, बांग्लादेश एयरफोर्स के पूरे बेड़े को खत्म करने में सक्षम है।
अग्नि-5 के सामने क्यों बेकार है यूरोफाइटर?
डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोई भी फाइटर जेट, अग्नि-5 जैसी मिसाइल को चुनौती नहीं दे सकते। बैलिस्टिक मिसाइलें री-एंट्री के दौरान हाइपरसोनिक स्पीड, यानी मैक 20 से मैक 25 तक की रफ्तार से उड़ान भरती हैं, जो किसी भी आधुनिक फाइटर जेट को प्रतिक्रिया देने का मौका नहीं देते हैं। यूरोफाइटर जैसे विमान इंटरसेप्शन, डॉगफाइट या एयर डिफेंस में सक्षम हो सकते हैं, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल को रोकना उसके औकात से बाहर की बात होती है। इसके अलावा अग्नि-5 के मोबाइल लॉन्चर इसे और ज्यादा घातक बनाते हैं, क्योंकि इन्हें पहले से पहचानना और निशाना बनाना बेहद मुश्किल होता है, जिससे किसी संभावित प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक की संभावना भी कम हो जाती है।

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