मुकेश अंबानी करेंगे बड़ी डील! गौतम अडानी ने खींच लिए थे हाथ, रिलांयस को कोई नहीं दे पाएगा टक्कर
Updated on
30-06-2025 03:09 PM
नई दिल्ली: रूस की एनर्जी कंपनी रोसनेफ्ट भारत में नायरा एनर्जी में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के साथ उसकी बात बन सकती है। पहले कई भारतीय कंपनियों से बात की गई लेकिन बात नहीं बनी। सरकारी कंपनियों ने भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब रिलायंस और रोसनेफ्ट के बीच शुरुआती बातचीत शुरू हो गई है। हालांकि अभी यह शुरुआती दौर में है। रोसनेफ्ट अपनी हिस्सेदारी के लिए 20 अरब डॉलर मांग रही थी। इतनी ज्यादा कीमत की वजह से पहले कई कंपनियों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।
सूत्रों के अनुसार, रोसनेफ्ट ने अब अपनी डिमांड को थोड़ा कम करके 17 अरब डॉलर कर दिया है। लेकिन यह कीमत भी रिलायंस के लिए बहुत ज्यादा है। हालांकि RIL ने इसे बाजार की अफवाह बताया है। लेकिन अगर यह बातचीत सफल होती है, तो रिलायंस भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी बन जाएगी। वह इंडियन ऑयल को पीछे छोड़ देगी। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस गुजरात के जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी चलाती है। इसकी क्षमता 68 मिलियन टन प्रति वर्ष है।
रिफाइनिंग कैपेसिटी
नायरा का अधिग्रहण करने से रिलायंस की क्षमता 20 मिलियन टन प्रति वर्ष बढ़ जाएगी। इससे इंडियन ऑयल की 80.7 मिलियन टन की क्षमता से ज्यादा हो जाएगी। इसके साथ ही, रिलायंस का बाजार में दबदबा भी बढ़ेगा। उसे 6,750 पेट्रोल पंप मिलेंगे। अभी रिलायंस के पास जियो-बीपी ब्रांड के तहत 1,700 से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं।
रोसनेफ्ट पिछले साल से नायरा से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है। 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों की वजह से रोसनेफ्ट अपने मुनाफे को वापस रूस नहीं भेज पा रही है। यह भी साफ नहीं है कि अगर सौदा हो जाता है, तो रोसनेफ्ट बिक्री से मिलने वाले पैसे को कैसे वापस भेजेगी।
अडानी ग्रुप की ना
सूत्रों का कहना है कि पिछले हफ्ते रिलायंस के फ्यूल रिटेल ब्रांड जियो-बीपी और अडानी-टोटल गैस के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों कंपनियां एक-दूसरे के आउटलेट से अपने-अपने ईंधन बेचेंगी। यह समझौता नायरा के अधिग्रहण की योजना का हिस्सा हो सकता है। अडानी ग्रुप को भी रोसनेफ्ट ने यह ऑफर दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।
इसकी वजह रोसनेफ्ट की ऊंची कीमत के साथ-साथ टोटल के साथ अडानी ग्रुप का समझौता भी है। इस समझौते के तहत अडानी ग्रुप अब जीवाश्म ईंधन में और निवेश नहीं कर सकता है। रिलायंस अगर नायरा का अधिग्रहण करती है, तो जियो-बीपी डील से उसे ईंधन बेचने के लिए आउटलेट मिल जाएंगे। वहीं, अडानी-टोटल गैस के सीएनजी कारोबार को नायरा के नेटवर्क तक पहुंच मिल जाएगी
अच्छे संबंध
सूत्रों का कहना है कि रोसनेफ्ट के साथ बातचीत रिलायंस की सऊदी अरामको के साथ O2C (तेल से रसायन) वेंचर में हिस्सेदारी खरीदने की कोशिश की तरह भी विफल हो सकती है। उस समय भी कीमत को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। रिलायंस के रोसनेफ्ट के साथ अच्छे संबंध हैं। दिसंबर 2024 में दोनों कंपनियों के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत रोसनेफ्ट, रिलायंस को प्रतिदिन 500,000 बैरल तेल की आपूर्ति करेगी। उस समय तेल की कीमतों के हिसाब से इस सौदे की कीमत लगभग 12-13 अरब डॉलर प्रति वर्ष थी।
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