भोपाल, प्रदेश में बिना भवन चल रहे या दूसरे स्कूलों के कमरों में संचालित सांदीपनि और शासकीय विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर नए सर्वसुविधायुक्त भवन दिए जाएंगे।सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए राज्य सरकार ने मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत केवल स्कूल भवनों के निर्माण पर ही जोर नहीं रहेगा, बल्कि अनुशासन और शैक्षणिक गुणवत्ता की भी निगरानी की जाएगी।
कक्षाओं में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों की नियमित उपस्थिति का डिजिटल आकलन किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों की गैरहाजिरी पर लगाम लगाना है। नई रणनीति में भवनविहीन स्कूलों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ कक्षाओं में नियमित पढ़ाई और शिक्षकों की मौजूदगी सुनिश्चित करने पर फोकस रहेगा।
योजना के प्रमुख बिंदु
- बुनियादी सुविधाएं : स्कूल इमारतों की मरम्मत, रंगाई-पुताई, पीने का साफ पानी, नए ब्लैक बोर्ड और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग क्रियाशील शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा।
- सोशल ऑडिट: पठन-पाठन का स्तर जांचने के लिए शिक्षा अधिकारी नियमित औचक निरीक्षण करेंगे। वहीं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के जरिए 'सोशल ऑडिट' कराया जाएगा।
- सुरक्षा और अनुशासन: खराब मौसम या बारिश के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम होंगे। अनुशासन रखने के लिए स्कूल परिसर में बिना अनुमति वीडियो बनाने या अन्य अनावश्यक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी।
- मिड-डे मील : मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर सीधी नजर रखी जाएगी और शिकायत मिलने पर तुरंत सुधार होगा। बच्चों की संख्या बढ़ने पर स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण किया जाएगा।