रूस के लिए जंग लड़ने वाले अमेरिकी सैनिक को मेडल:पिछले साल यूक्रेन में मारा गया

Updated on 10-08-2025 02:46 PM

यूक्रेन के खिलाफ जंग में रूस के लिए लड़ने वाले अमेरिकी सैनिक को राष्ट्रपति पुतिन ने मरणोपरांत ऑर्डर ऑफ लेनिन मेडल से सम्मानित किया है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी युवक का नाम माइकल ग्लॉस (21) था। वह पिछले साल यूक्रेन में रूस की तरफ से लड़ते हुए मारा गया था।

माइकल अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA की सीनियर अधिकारी जूलियन गलीना का बेटा था। गलीना CIA में डिजिटल इनोवेशन की डिप्टी डायरेक्टर हैं। माइकल 2023 की सर्दियों में रूस की सेना में भर्ती हुआ था।

माइकल ने मॉस्को के रेड स्क्वायर से सेल्फी पोस्ट की थी और सोशल मीडिया पर यूक्रेन युद्ध को प्रॉक्सी वॉर बताते हुए पश्चिमी मीडिया को प्रोपगेंडा कहा था। रूसी मीडिया ने अप्रैल 2024 में उसकी मौत की खबर दी।

CIA ने माइकल को मानसिक रोगी बताया था

CIA ने बयान कर जारी बताया कि माइकल मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था। एजेंसी ने उसकी मौत राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं माना है।

माइकल के पिता लैरी ग्लॉस अमेरिका के लिए इराक वॉर में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि,

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हमें डर था कि रूस में कोई उसकी मां की पहचान न जान ले और उसे राजनीतिक मकसद से इस्तेमाल करे।

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क्रेमलिन ने ‘ऑर्डर ऑफ लेनिन’ मेडल देने की बात आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं की है। यह सोवियत दौर का एक बड़ा नागरिक सम्मान है। अभी यह साफ नहीं है कि मेडल आखिर कहां गया। व्हाइट हाउस, CIA और विटकॉफ ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।

गालिना CIA की डिजिटल इनोवेशन चीफ है

सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी CIA की डिप्टी डायरेक्टर जूलियान जे. गालिना डिजिटल इनोवेशन की चीफ हैं। उन्हें इस पद पर जनवरी 2024 में नियुक्त गया है।

गालिना ने अपने करियर की शुरुआत यूएस नेवल एकेडमी से की थी। यहां 1992 में वे ब्रिगेड ऑफ मिडशिपमेन की पहली महिला लीडर बनीं। 1846 में एकेडमी की स्थापना के बाद ऐसा पहली बार हुआ था।

गालिना को क्रिप्टोलॉजिक ऑफिसर के रूप में कमीशन किया गया और उन्होंने एक्टिव ड्यूटी तथा नेवी रिजर्व में सेवा दी। 2013 में वे कमांडर रैंक के साथ रिटायर हुईं।

यूक्रेन जंग में 600 से ज्यादा अमेरिकी लड़ रहे

कनाडा की कार्लेटन यूनिवर्सिटी की 12 जून 2025 को पब्लिश हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक, 600 से ज्यादा अमेरिकी नागरिक यूक्रेन में युद्ध लड़ रहे हैं। इनमें रूस और यूक्रेन दोनों की तरफ से लड़ने वाले सैनिक शामिल हैं।

इनमें ज्यादातर पुरुष हैं, जिनकी औसत उम्र 32 साल है। इनमें से 60% से ज्यादा के पास यू.एस. आर्मी, ग्रीन बेरे, या नेवी सील्स की सैन्य ट्रेनिंग का अनुभव हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक ये लड़ाके अलग-अलग वजहों से यूक्रेन पहुंचे हैं, जो नशे की लत, कैंसर या अवसाद से जूझ रहे हैं।



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