288 साल पुराने वाडिया ग्रुप में जेह की 3 साल बाद वापसी, बॉम्बे डाइंग को मिलेगा नया बॉस!
Updated on
16-12-2024 04:40 PM
नई दिल्ली: देश के सबसे पुराने औद्योगिक घरानों में से एक वाडिया ग्रुप के संरक्षक नुस्ली वाडिया के छोटे बेटे जहांगीर (जेह) वाडिया एक बार फिर ग्रुप की कंपनियों के बोर्ड में शामिल हो गए हैं। उनकी तीन साल बाद बिजनस में वापसी हुई है। इस दौरान वह लंदन चले गए थे। सूत्रों के मुताबिक लंदन में 51 वर्षीय जहांगीर और 81 वर्षीय नुस्ली वाडिया के बीच हुई बातचीत के बाद उनकी वापसी हुई है। सीनियर वाडिया अपने बेटे को वापस भारत लौटने, ग्रुप के ऑपरेशन में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करने और अपनी की कुछ जिम्मेदारियां संभालने के लिए राजी करने में सफल रहे। मार्च 2021 में जहांगीर ने अचानक वाडिया ग्रुप की सभी कंपनियों का बोर्ड छोड़ दिया था और अपने परिवार के साथ लंदन में बस गए थे।
उस समय यह माना गया था कि वाडिया परिवार रणनीतिक निर्णय के हिस्से के रूप में ग्रुप में एग्जीक्यूटिव रोल छोड़ना चाहता है लेकिन शेयरहोल्डर के तौर पर बने रहना चाहता है। इसका मकसद शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करना था। नुस्ली वाडिया करीब 60 साल से ग्रुप को संभाल रहे हैं। एक सूत्र ने कहा, 'शायद उन्हें लगता है कि अब समय आ गया है कि युवा पीढ़ी को कमान दी जाए, ताकि वे पेशेवरों के साथ मिलकर ग्रुप को आगे बढ़ा सकें।' जहांगीर का परिवार लंदन में रहता है, लेकिन अब वह कंपनियों का नेतृत्व करने के लिए भारत में काफी समय बिताएंगे। वाडिया ग्रुप ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
बॉम्बे डाइंग की कमान
जहांगीर के साथ मिलकर काम कर चुके एक अधिकारी ने कहा कि यह ग्रुप और बिजनस के लिए अच्छी बात है कि नुस्ली वाडिया अपने बेटे को वापस लाने में सफल रहे हैं। जहांगीर का विजन क्लीयर है और उनके पास बिजनस की बेहतरीन समझ है। साथ ही वह बिजनस की स्थिति को अच्छी तरह से समझने और योजना बनाने की असाधारण क्षमता रखते हैं। जहांगीर को ब्रिटानिया में एक नॉन-एग्जीक्यूटिव रोल में फिर से नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि वह बॉम्बे डाइंग के एमडी बन सकते हैं। उन्होंने 2021 तक एमडी के रूप में गोएयर का नेतृत्व किया था, जो वर्तमान में दिवालियापन समाधान से गुजर रही है। जहांगीर के बड़े भाई 53 वर्षीय बड़े भाई नेस वाडिया बॉम्बे बर्मा और नेशनल पेरोक्साइड के एमडी हैं। वह और उनके पिता सभी कंपनियों के बोर्ड में हैं। इनमें ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी और कैश काउ ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज शामिल हैं। नुस्ली वाडिया ग्रुप की सभी कंपनियों को देखते हैं लेकिन ब्रिटानिया पर उनकी विशेष रूप से कड़ी नजर रहती है। सूत्रों का कहना है कि ग्रुप के टॉप एग्जीक्यूटिव नुस्ली वाडिया को सलाह दे रहे थे कि वह उत्तराधिकार योजना के साथ-साथ बिजनस की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए जहांगीर को मैनेजमेंट में वापस लाएं।
वाडिया का कारोबार
288 साल पुराने वाडिया ग्रुप की पब्लिक कंपनियों में ब्रिटानिया, बॉम्बे डाइंग, नेशनल पेरोक्साइड और बॉम्बे बर्मा का कुल मार्केट कैप 1.38 लाख करोड़ रुपये है। इनमें से दो कंपनियों सौ साल से अधिक समय से लिस्टेड हैं। बॉम्बे डाइंग ने 125 साल से अधिक समय से लगातार डिविडेंड दिया है जबकि बॉम्बे बर्मा भारत में लिस्ट होने वाली दूसरी कंपनी थी। इस ग्रुप का रियल एस्टेट के साथ भी लंबा जुड़ाव रहा है। 1908 और 1956 के बीच ग्रुप ने पारसी समुदाय के लिए मुंबई में 35 एकड़ से अधिक की प्रमुख संपत्ति पर पांच आवासीय परिसर बनाने में मदद की था। 2011 में ग्रुप ने बॉम्बे रियल्टी लॉन्च की थी।
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