पाकिस्तान पर हमला करेगा भारत, मोदी ने की दर्जन भर ग्लोबल लीडर्स से बात, 100 राजनयिकों को दी जानकारी

Updated on 28-04-2025 06:11 PM
वॉशिंगटन: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत, पाकिस्तान पर हमला करने वाला है। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने चार डिप्लोमेट्स के हवाले से ऐसा दावा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 22 अप्रैल को कश्मीर में हुए भयानक और बर्बर आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दुनिया के दर्जन भर से ज्यादा नेताओं से बात कर चुके हैं। अधिकारियों ने बताया है कि भारत की राजधानी में 100 मिशनों के डिप्लोमेट्स को भारतीय विदेश मंत्रालय ने ब्रीफिंग के लिए बुलाया था। द न्यूयॉर्क टाइम्स इंटरनेशनल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लोबल लीडर्स को टेलीफोन मदद मांगने के लिए नहीं किया था, बल्कि ये बताने के लिए किया था कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत क्या एक्शन लेने जा रहा है।"
भारत ने पाकिस्तान पर पहलगाम में आतंकी हमला करने का आरोप लगाया है। माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर के आदेश के आदेश पर आतंकवादियों ने हमला किया था, क्योंकि वो पाकिस्तान की सत्ता पर नियंत्रण हासिल करना चाहते हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स इंटरनेशनल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के साथ चर्चाओं से अवगत चार राजनयिक अधिकारियों ने कहा है कि "नई दिल्ली अपने पड़ोसी और कट्टर दुश्मन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए मामला तैयार कर रही है। मोदी ने "ऐसी सजा का वादा किया है जिसकी वे कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।"
पाकिस्तान पर हमला करेगा भारत!
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अभी तक आधिकारिक तौर आतंकवादियों ने पहचान नहीं की है और भारत ने इस बार सार्वजनिक तौर पर सबूत भी नहीं दिए हैं। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि इस हमले में पाकिस्तान का हाथ है। जबकि पाकिस्तान सरकार ने आरोपों से इनकार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय विदेश मंत्रालय में जब विदेशी मिशनों के राजनयिकों को ब्रीफिंग दी गई थी, उस दौरान भारतीय अधिकारियों ने भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादी समूहों के लिए पाकिस्तान के पिछले समर्थन के पैटर्न के बारे में जानकारी दी थी। राजनयिक अधिकारियों ने इसका खुलासा किया है। भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि उनकी जांच जारी है। इसके अलावा भारत ने डिप्लोमेट्स को आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ होने की कुछ खुफिया जानकारियां दी गई हैं। भारत ने जो जानकारी दी, उनमें अपराधियों के चेहरे की पहचान करने वाले डेटा शामिल हैं, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे पाकिस्तान से जुड़े हैं।
अमेरिकी अखबार ने कहा है कि एक्सपर्ट्स और डिप्लोमेट्स से हुई बातचीत के आधार पर दो संभावनाएं बन रही हैं। एक तो इस बात का इशारा मिल रहा है कि "भारत को पाकिस्तान पर हमला करने से पहले आतंकवादी हमले के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए अधिक समय चाहिए", या दूसरी बात ये कि "ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर इस वक्त जब कई युद्धों की वजह से अराजकता मची है, उस वक्त भारत को अपने एक्शन को सही ठहराने के लिए कोई जस्टिफिकेशन देने की बहुत कम आवश्यकता महसूस हो रही है।"
एक्सपर्ट्स आशंका जता रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु बम वाले देश हैं, ऐसे में अगर हमले होते हैं तो फिर उस कंट्रोल करना काफी मुश्किल हो जाएगा। द न्यूयॉर्क टाइम्स इंटरनेशनल ने कहा है कि इसके बावजूद ऐसा लग रहा है कि "भारत पर अपनी प्रतिक्रिया की सीमित करने के लिए किसी भी वैश्विक दबाव का असर नहीं पड़ा है और हाल के वर्षों में अपनी कूटनीतिक और आर्थिक शक्ति बढ़ने के बाद भारत, अपनी ताकत दिखाने में भी तेज हो गया है। ईरान और सऊदी अरब की सरकारों ने दोनों पक्षों से बात की है, और ईरान के विदेश मंत्री ने सार्वजनिक रूप से मध्यस्थता की पेशकश की है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने संयम और बातचीत का आह्वान किया है। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका सहित प्रमुख शक्तियों से भारत को समर्थन मिला हुआ है। ऐसे में विश्लेषकों का कहना है, कि भारत न्याय की अपनी खोज के लिए कई देशों द्वारा समर्थन को हरी झंडी के रूप में मान रहा है।"
भारत के युद्ध में शामिल होगा अमेरिका?
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने काफी मजबूती के साथ भारत को समर्थन देने की बात कही है। लेकिन फिलहाल कहा नहीं जा सकता है कि अमेरिका, भारत के युद्ध में शामिल होगा या नहीं। लेकिन अगर अमेरिका शामिल नहीं भी होता है फिर भी दक्षिण एशियाई देश अगर जंग में शामिल होते हैं तो अमेरिका का प्रभाव होगा ही। जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज के एक वरिष्ठ फेलो डैनियल मार्की ने कहा है कि 2019 में ट्रंप प्रशासन ने पिछले भारत और पाकिस्तान के बीच बने तनावपूर्ण हालात के दौरान जो रूख अपनाया था, वही रूख इस बार भी अपनाया है। उस समय, ट्रंप प्रशासन ने भारत के लिए समर्थन का संकेत दिया था। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने संयम बरतने के लिए अपना कूटनीतिक दबाव तभी बढ़ाया, जब भारत ने सीमा पार हवाई हमले करके पाकिस्तान पर हमला किया था।


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