तमिलनाडु में जीते तो साथ करेंगे राज, पावर शेयरिंग को लेकर बीजेपी और AIADMK सहमति के करीब

Updated on 12-01-2026 12:16 PM
नई दिल्ली/चेन्नै: तमिलनाडु में बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच सीट शेयरिंग के साथ ही पावर शेयरिंग को लेकर भी बातचीत चल रही है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक एआईएडीएमके इसके लिए लगभग राजी हो गई है कि चुनाव से पहले पावर शेयरिंग का ऐलान भी कर दिया जाएगा। यानी ये ऐलान कि अगर एनडीए चुनाव जीतती है तो सरकार एनडीए की होगी ना कि सिर्फ एआईएडीएमके की। विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन हुआ है।

पिछले साल एआईएडीएमके ने की एनडीए में वापसी

पिछले साल अप्रैल में जब बीजेपी नेता अमित शाह तमिलनाडु गए थे तब तमिलनाडु की पार्टी एआईएडीएमके की एनडीए में वापसी का ऐलान किया गया। अमित शाह ने बीजेपी और एआईएडीएमके गठबंधन का ऐलान किया। शाह ने कहा था कि विधानसभा चुनाव एआईएडीएमके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और सरकार एनडीए की बनेगी। हालांकि इस ऐलान के कुछ वक्त बाद ही एआईएडीएमके नेताओं की तरफ से बयान आने लगे जिसमें कहा जाने लगा कि एनडीए चुनाव जीतेगी तब भी सरकार एआईएडीएमके की बनेगी।

पहले अकेले सरकार बनाना चाहते थे पलानीस्वामी

एआईएडीएमके नेता एडप्पडी के. पलानीस्वामी ने भी कुछ मौकों पर कहा कि अगर उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव जीतती है तो तमिलनाडु में उनकी पार्टी की सिंगल पार्टी सरकार बनेगी। साथ ही कहा कि हमारा गठबंधन जरूर जीतेगा... लेकिन सरकार एआईएडीएमके ही अकेले बनाएगी। यह गठबंधन एआईएडीएमके के नेतृत्व में है। जिसके बाद से ही पावर शेयरिंग का पेंच फंसता दिखा। हालांकि सूत्रों के मुताबिक अब यह मसला सुलझा लिया है। पिछले हफ्ते ही अमित शाह और एआईएडीएमके नेताओं के बीच हुई मुलाकात में बीजेपी की तरफ साफ कह दिया गया कि सरकार एनडीए की बनेगी यानी बीजेपी भी पावर शेयर करेगी। सूत्रों के मुताबिक एआईएडीएमके नेता चुनाव से पहले खुद ही इसका ऐलान भी कर सकते हैं।

डीएमके और एआईएडीएमके अकेले करती रही है राज

दरअसल तमिलनाडु में गठबंधन होने के बावजूद पावर शेयरिंग मुद्दा पहले से रहा है। तमिलनाडु में आजतक न तो डीएमके ने और न ही एआईएडीएमके ने सत्ता शेयर की है। तमिलनाडु में वैसे तो 1967 से ही चुनाव पूर्व गठबंधन की परंपरा रही है। 1979 से ही कभी डीएमके तो कभी एआईएडीएमके केंद्र में गठबंधन सरकारों का हिस्सा बनते रहे हैं। 1979 में चरण सिंह सरकार में एआईएडीएमके के दो सांसद शामिल थे। करीब एक दशक बाद डीएमके के मुरासोली मारन केंद्र की वी.पी. सिंह की सरकार में मंत्री बने। 1996 से गठबंधन युग की शुरुआत हुई और तब से खास तौर से डीएमके ने लंबे वक्त तक केंद्र की सत्ता में भागीदारी निभाई। 1998-99 में एआईएडीएमके भी वाजपेयी सरकार का हिस्सा रही। वाजपेयी सरकार से लेकर यूपीए-1 और यूपीए-2 तक में डीएमके के लोग केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल रहे। लेकिन जब तमिलनाडु में गठबंधन की बात आती है तो ये दोनों पार्टियां यहां गठबंधन की सरकार नहीं चाहती।

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