भारत और बांग्लादेश के बीच कैसे होंगे रिश्ते? जमात-ए-इस्लामी चीफ ने दिया ये जवाब

Updated on 06-02-2026 12:18 PM
ढाका: बांग्लादेश में अगले सप्ताह होने वाले चुनावों पर नई दिल्ली करीब से नजर बनाए हुए है। सभी की चिंता इस बात को लेकर है कि पड़ोसी देश में अगर जमात-ए-इस्लामी पार्टी सत्ता में आती है तो ढाका और नई दिल्ली के रिश्ते कैसे होंगे। इस बीच बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने भारत के साथ संबंधों पर एक बयान दिया है। जब एक पत्रकार ने शफीकुर रहमान से जमात के सत्ता में आने पर भारत से रिश्ते पर सवाल किया तो उन्होंने हरी रोशनी की ओर इशारा किया और कहा, जब भारत के साथ संबंधों की बात आती है तो क्या आप देख सकते हैं कि यह कितना रंगीन है। इसके बाद वह हंसते हुए चले गए।

जमात और भारत के रिश्ते

जमात चीफ का यह बयान रहस्यमय है लेकिन यह शायद संकेत है कि जमात भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने के लिए तैयार हो सकती है। पाकिस्तान समर्थक, बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी पार्टी अपने भारत विरोधी रुख के लिए जानी जाती रही है और इसने हसीना को शरण देने के लिए भी भारत को निशाना बनाया है। जमात समर्थकों ने भारत के पूर्वोत्तर को लेकर भड़काऊ बयान दिए हैं। लेकिन हाल के दिनों में जमात के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी बयानबाजी में नरमी बरती है।

भारतीय राजनयिक से जमात चीफ की मुलाकात

कुछ दिनों पहले ही शफीकुर रहमान ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि साल 2025 में एक भारतीय राजनयिक ने उनसे मुलाकात की थी। जमात ने हाल के दिनों में हिंदुओं के प्रति अपनी छवि को बदलने की भी कोशिश की है। हिंदू बहुल निर्वाचन क्षेत्र में इसने हिंदू उम्मीदवार भी खड़ा किया है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव

शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद बांग्लादेश और भारत के रिश्ते तनाव से गुजर रहे हैं। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने स्वीकार किया है कि अंतरिम सरकार के दौरान ढाका और नई दिल्ली के रिश्ते सहज नहीं रहे हैं। हालांकि, हुसैन ने उम्मीद जताई कि चुनी हुई सरकार इसका समाधान करेगी और संबंधों को सहज बनाएगी।
हुसैन गुरुवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, मैं किसी को दोष नहीं देना चाहता। भारत ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए काम किया है, जिसे वह अच्छा समझता है। हमने भी इस तरह से काम करने की कोशिश की है जो हमारे हितों की रक्षा करे। कई मामलों में दोनों पक्षों की उम्मीदें मेल नहीं खाती थीं।

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