कितने डिब्बे होंगे और कितने लोग कर सकेंगे सफर... भारत की पहली बुलेट ट्रेन को लेकर आई बड़ी खबर
Updated on
21-05-2024 02:32 PM
नई दिल्ली: देश का पहला हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई और अहमदाबाद के बीच विकसित किया जा रहा है। इस पर अगस्त 2026 में पहली ट्रेन चलने की उम्मीद है। जापान को दो कंपनियों हिताची और कावासाकी ने भारत को बुलेट ट्रेन सप्लाई करने के लिए एक कंसोर्टियम बनाया है। नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट के लिए 18 बुलेट ट्रेन खरीदेगा। इनमें से प्रत्येक ट्रेन में 10 कोच होंगे और इसमें 690 लोग सफर कर सकते हैं। इस ट्रेन में भारतीय परिस्थितियों के मुताबिक बदलाव किए जा रहे हैं। यह ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम होगी। 508 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन पीएम शिंजो आबे ने रखी थी। माना जा रहा है कि बुलेट ट्रेन के शुरू हो जाने से मुंबई और अहमदाबाद के बीच का सफर मात्र साढ़े तीन घंटे में पूरा हो सकेगा।
हिंदू बिजनसलाइन की एक रिपोर्ट में रेलवे अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि जापान की दो कंपनियों ने भारत को बुलेट ट्रेन सप्लाई करने के लिए एक कंसोर्टियम बनाया है। उसने बुलेट ट्रेन के डिजाइन पर बातचीत शुरू कर दी है। भारत के मौसम और दूसरी परिस्थितियों के मुताबिक इसके डिजाइन में बदलाव किए जाएंगे। इन कंपनियों ने भारत को Shinkansen ट्रेनों की सप्लाई में दिलचस्पी दिखाई है। लेकिन भारतीय रेलवे के अधिकारियों ने इसके डिजाइन में बदलाव की मांग की थी ताकि इसकी कीमत में कमी लाई जा सके और इसे भारतीय परिस्थितियों के मुताबिक बनाया जा सके। अब इन कंपनियों ने नए डिजाइन के साथ प्रपोजल सौंपा है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (JICA) ने लोन दिया है। लोन की शर्तों के मुताबिक केवल जापानी कंपनियों ही बिड में हिस्सा ले सकती हैं।
कितनी है लागत
इस प्रोजेक्ट का 348.04 किमी हिस्सा गुजरात, 155.76 किमी महाराष्ट्र में और 4.3 किमी हिस्सा दादरा एवं नगर हवेली में है। इस रूट पर कुल 12 स्टेशन बनेंगे। इस प्रोजेक्ट पर एक लाख करोड रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है। एनएचएसआरसीएल इस प्रोजेक्ट को बना रही है। शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार केंद्र सरकार इसमें ₹10,000 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। गुजरात और महाराष्ट्र को प्रत्येक को ₹5,000 करोड़ का भुगतान करना होगा। प्रोजेक्ट की बाकी राशि जापान से 0.1 प्रतिशत के मामूली ब्याज पर मिले लोन से मिली रकम से खर्च की जाएगी। पहले इसकी डेडलाइन 2022 थी जिसे बढ़ाकर 2023 किया गया। अब इस पर अगस्त 2026 में ट्रायल शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।
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