
जीएसटी अधिकारियों द्वारा बोगस फर्म या संबंधित फर्म से लेन देन करने वालों की आईटीसी ब्लॉक करने के मामलों में राहत मिलेगी। दरअसल, हाल ही में दिए एक निर्णय में पश्चिम बंगाल हाई कोर्ट ने कहा है कि सबसे पहले गलती करने वाले काे पकड़ें। सप्लायर की जांच हो उसके बिना सेवा या माल लेने वालों पर कार्रवाई करना पूरी तरह गलत और गैरकानूनी है।
एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि टैक्स अधिकारियों के लिए जेन्युइन करदाता पर कार्रवाई करना आसान होता है बजाय इसके कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जांच की जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दिए गए नोटिस और आदेश को भी खारिज कर दिया।
मप्र में कर सलाहकारों के मुताबिक लगातार ऐसे मामले आते हैं जिनमें बिना जांच या आदेश के संदिग्ध फर्म से सेवा या उत्पाद लेने वालों की आईटीसी ब्लॉक हो जाती है। पिछले साल चले जीएसटी सर्वे अभियान में ऐसे तमाम तरह के मामले सामने आए थे। इनमें 10000 -20000 से लेकर 10-15 लाख तक की आईटीसी ब्लॉक हुई थी। कमिश्नर कमर्शियल टैक्स स्वतंत्र कुमार सिंह से ऐसे मामलों पर चर्चा का प्रयास किया गया पर बात नहीं हो सकी।
बिना जांच -आदेश कार्रवाई गलत : जीएसटी एक्सपर्ट
जीएसटी एक्सपर्ट मुकुल शर्मा ने कहा कि सबसे पहले संदिग्ध मिली फर्म की जांच कर वसूली होनी चाहिए बाद में उससे सेवा-उत्पाद लेने वालों की। यदि संदिग्ध फर्म नहीं मिलती तो रिसिपिएंट की आईटीसी उसी सूरत में ब्लॉक कर सकते हैं जब उसकी संदिग्ध फर्म से साठ गांठ के सबूत हों। यदि उस फर्म के पास व्यापर के दस्तावेज और सबूत हों तो कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। बिना नोटिस आदेश कार्रवाई होती है।