हिजबुल्लाह बोला-जंग हुई तो इजराइल का कोई कोना नहीं छोड़ेंगे

Updated on 20-06-2024 02:06 PM

लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह ने बुधवार को इजराइल को चेतावनी दी है। नसरहल्लाह ने कहा कि अगर इजराइल के साथ जंग हुई तो वहां एक भी जगह सुरक्षित नहीं बचेगी। इसके अलावा नसरल्लाह ने साइप्रस को भी हमले की धमकी दी है।

नसरल्लाह ने कहा कि अगर इजराइल ने हमला किया तो हम जमीन, हवा और पानी हर तरफ से उन पर अटैक करेंगे। इससे भूमध्य सागर भी खतरे में पड़ सकता है। हिजबुल्लाह बिना किसी नियम और सीमा के लड़ने को तैयार है। हमारे दुश्मन जानते हैं कि उनकी कोई भी जगह हमारे रॉकेट से बच नहीं पाएगी।

वहीं साइप्रस को जंग की धमकी देते हुए नसरहल्लाह ने कहा कि उन्होंने जंग के दौरान इजराइल को अपने एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की इजाजत दी है। अगर उसने लेबनान पर हमले में भी इजराइल की मदद की हिजबुल्लाह उसे जंग का हिस्सा मानेगा। इसके बाद उसे भी हिजबुल्लाह के हमलों को झेलना पड़ेगा।

नसरल्लाह के भाषण के बाद साइप्रस के राष्ठ्रपति ने कहा है कि उनका देश किसी भी तरह से जंग का हिस्सा नहीं है। साइप्रस जंग नहीं बल्कि उसका हल निकालने की मुहिम में शामिल रहा है।

इजराइली सेना बोली- हमास एक विचारधारा है, जंग के जरिए उसे मिटा नहीं सकते
दूसरी तरफ इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) के प्रवक्ता एडमिरल डैनियल हगारी ने कहा है कि हमारी जंग हमास को खत्म करने के मकसद के लिए काफी नहीं है। हमास के खात्मे की सोच इजराइलियों की आंख में धूल झोंकने जैसा है। हमास एक विचारधारा है। यह फिलिस्तीनियों के दिल में बसी हुई है। जिसे भी लगता है कि वह हमास को मिटा सकता है, वो गलत है।

हगारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने जलद कोई और विकल्प नहीं निकाला तो हमास हमेशा हमारे बीच बना रहेगा। इसके जवाब में नेतन्याहू के ऑफिस ने एक स्टेटमेंट जारी कर कहा कि जंग में हमारा एक लक्ष्य हमास की सैन्य क्षमता को खत्म करना है। IDF इसके लिए प्रतिबद्ध है। इसके इतर दिया कोई भी बयान लक्ष्य से भटकाने जैसा माना जाएगा। ​​​​​

इजराइल में 9 महीने 6 दिन बाद वॉर कैबिनेट भंग
इससे पहले 17 जून को नेतन्याहू ने हमास के खातमे के लिए बनी वॉर कैबिनेट को भंग कर दिया था। कैबिनेट 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद 11 अक्टूबर को बनाई गई थी। नेतन्याहू ने कैबिनेट भंग करते हुए कहा था कि हमने कई ऐसे फैसले लिए थे जिनसे सेना सहमत नहीं थी।

दरअसल, नेतन्याहू के नेतृत्व में बनी वॉर कैबिनेट में काफी दिनों से मतभेद चल रहे थे। इसके चलते कैबिनेट के मेंबर बेनी गांट्ज ने इस्तीफा भी दे दिया था। उन्होंने इसकी वजह गाजा युद्ध में होस्टेज डील को लेकर PM नेतन्याहू के गलत रवैये को बताया था। गांट्ज ने आरोप लगाया था कि नेतन्याहू की वजह से हमास का खात्मा नहीं हो पा रहा है। इसलिए वो वॉर कैबिनेट छोड़ रहे हैं।

नेतन्याहू की गठबंधन सरकार में शामिल कट्टरपंथी पार्टियों के नेता नई वॉर कैबिनेट की मांग कर रहे हैं। इसमें बेन ग्विर को शामिल करने को कहा जा रहा है। ग्विर फिलहाल इजराइल के इंटीरियर सिक्योरिटी मिनिस्टर हैं। उन पर फिलिस्तीन विरोधी होने के आरोप लगते हैं।

वॉर कैबिनेट के भंग होने की वजह

  • कट्टरपंथी बेन ग्विर की कैबिनेट में एंट्री को रोकना न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक PM बेंजामिन नेतन्याहू ने वॉर कैबिनेट को भंग कर दिया क्योंकि वो इसमें अति दक्षिणपंथी पार्टियों की एंट्री रोकना चाहते थे। 9 अक्टूबर को बेनी गांट्ज और गादी आइजेनकॉट के कैबिनेट से निकलने के बाद बेन ग्विर इसमें शामिल होने का दबाव बनाने लगे थे। बेन ग्विर ने खुलेआम कहा कि अब समय आ गया है कि सही और बहादुरी से भरे फैसले लिए जाएं। उन्होंने इजराइल की सुरक्षा के लिए इसे जरूरी बताया था।
  • अमेरिका का दबाव अमेरिका में इसी साल नवंबर में चुनाव हैं। अमेरिकी सरकार पर जंग रोकने का भारी दबाव है। जो बाइडेन बीते कुछ महीनों से लगातार इजराइल से जंग रोकने को कह रहे हैं। वॉर कैबिनेट के भंग होने से जंग रोकने का प्रयास कमजोर पड़ सकता है।
  • बॉर्डर सिक्योरिटी कैबिनेट वॉर कैबिनेट के भंग होने के बाद अब गाजा युद्ध से जुड़े फैसले बॉर्डर सिक्योरिटी कैबिनेट में लिए जाएंगे। हालांकि इस कैबिनेट में पहले से बेन ग्विर और फाइनेंस मिनिस्टर बेजालेल स्मोत्रिच जैसे अति दक्षिणपंथी नेता हैं। ये गाजा में और अधिक बमबारी करने के पक्ष में और हमास के खत्म होने तक जंग जारी रखने के पक्ष में हैं।


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