
जानकारी के मुताबिक, 4 अप्रैल से लाल परेड ग्राउंड में एनएसजी की मॉक ड्रिल चल रही थी। सोमवार को इसका तीसरा दिन था। सुबह करीब सात बजे रावेंद्र ग्राउंड पहुंचे और आठ बजे से शुरू हुई ड्रिल में शामिल हुए। इस दौरान सभी जवान एनएसजी कमांडो की कार्यप्रणाली का प्रशिक्षण ले रहे थे। करीब नौ बजे के आसपास रावेंद्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई। वे बिना किसी को बताए वहां से निकलकर कंट्रोल रूम के पीछे स्थित बैरक में चले गए और आराम करने लगे। करीब दस बजे साथियों ने जब उन्हें देखा तो वे अचेत पड़े थे।
तुरंत अधिकारियों को सूचना दी गई और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि की। सूचना मिलने पर अरेरा हिल्स थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजनों को सौंप दिया गया है। कमांडो की असमय मौत से पुलिस महकमे में शोक का माहौल है।
लाल परेड ग्राउंड में एनएसजी द्वारा आयोजित मॉक ड्रिल में आतंकवादी हमले की स्थिति का वास्तविक प्रदर्शन किया जा रहा था। इस प्रशिक्षण में एसटीएफ और एटीएस के जवान भी शामिल थे, जिन्हें हाई-रिस्क ऑपरेशन से निपटने की तकनीक सिखाई जा रही थी। सात अप्रैल से एसटीएफ और एटीएस का विस्तृत प्रशिक्षण भी होना है।
रावेंद्र भदौरिया अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों, एक बेटा और एक बेटी को छोड़ गए हैं। उनका परिवार मूल रूप से उदयपुरा में रहता है। भोपाल में नौकरी के चलते वे पुलिस लाइन में रह रहे थे। उनकी अचानक मौत से परिवार में मातम पसरा है और स्वजन गहरे सदमे में हैं। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।