जर्मन टेक्नोलॉजी और इंडिया की यूथ फोर्स, 20K से सीधे 90000 वीजा लिमिट करने के पीछे है 'डेडली कॉम्बिनेशन'

Updated on 26-10-2024 12:36 PM
नई दिल्ली: यूरोप की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश जर्मनी ने भारत के स्किल्ड वर्कर्स के लिए वीजा का सालाना कोटा 4.5 गुना बढ़ा दिया है। जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज इन दिनों भारत की यात्रा पर आए हुए हैं। शुक्रवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की। इसके बाद मोदी ने कहा कि जर्मनी ने कुशल भारतीयों के लिए वीजा की संख्या 20,000 से बढ़ाकर 90,000 प्रति वर्ष करने का निर्णय लिया है। जर्मनी में पिछले कुछ समय से कुशल कारीगरों की भारी कमी महसूस की जा रही है। इससे निपटने के लिए जर्मनी की सरकार भारत की ओर देख रही है। अमेरिका और चीन के बाद जर्मनी दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी है जबकि भारत पांचवें नंबर पर है।

मोदी ने जर्मन बिजनस के एशिया-प्रशांत सम्मेलन में बोलते हुए कहा, 'मुझे विश्वास है कि इस कदम से जर्मनी की आर्थिक वृद्धि को और बढ़ावा मिलेगा।' जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ड के साथ सम्मेलन में भाग लेते हुए मोदी ने कहा कि रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए जर्मनी का समग्र दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि जर्मनी ने भारत के स्किल्ड वर्कफोर्स में जो भरोसा जताया है, वह बहुत बड़ा है। जर्मनी अपनी तकनीक के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस तरह जर्मन टेक्नोलॉजी और भारत के स्किल्ड वर्कर्स मिलकर दुनिया पर राज कर सकते हैं।

जर्मनी में भारतीय वर्कर्स


उन्होंने जर्मनी के उद्योगपतियों से भारत में निवेश का अनुरोध करते हुए कहा कि भारत की विकास यात्रा में शामिल होने का यह सही समय है। भारत वैश्विक व्यापार और विनिर्माण केंद्र बन रहा है। आज भारत लोकतंत्र, जनसांख्यिकी, मांग और डेटा के मजबूत स्तंभों पर खड़ा है। जर्मनी कुशल पेशेवरों की भारी कमी का सामना कर रहा है और इस कमी को पूरा करने के लिए भारत में प्रतिभाओं की तलाश कर रहा है। हाल के वर्षों में जर्मनी जाने वाले भारत के स्किल्ड वर्कर्स की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी जर्मनी में करीब 1,37,000 भारतीय कुशल कारीगर काम कर रहे हैं।

जर्मनी में कामगारों की कमी का एक बड़ा कारण यह है कि वहां की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। जानकारों की मानें तो कुशल कारीगरों की कमी से जूझ रहे जर्मनी को आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर और भी गंभीर दुष्परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। स्किल्ड वर्कफोर्स की कमी के कारण जर्मनी के प्रतिद्वंद्विता में पिछड़ने की आशंका जताई जा रही है। अपनी इकॉनमी को पटरी पर रखने के लिए जर्मनी को भारत के स्किल्ड वर्कफोर्स की जरूरत है। यही वजह है कि जर्मनी ने भारत के स्किल्ड वर्कर्स के लिए अपने दरवाजे खोले हैं।

स्किल्ड लेबरफोर्स की कमी


एक रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी 70 से अधिक बिजनस वर्कफोर्स की कमी का सामना कर रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन, विनिर्माण, निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, इंजीनियरिंग और आईटी शामिल हैं। हाल के महीनों में देश में श्रम कानूनों में कई बदलाव लागू किए गए है। इससे कुशल श्रमिकों के लिए देश में रहना आसान हुआ है। सरकार ने श्रमिकों के लिए जर्मनी को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए सुधार किए हैं। इससे अप्रूवल क्वालिफिकेशन का इंतजार कर रहे ईयू ब्लू कार्ड वाले विदेशी श्रमिकों को तीन साल तक रहने की क्षमता के साथ देश में काम करने की अनुमति भी मिल जाएगी।

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