
इन राज्यों की आपत्तियां हैं कि मनरेगा से ‘महात्मा गांधी’ का नाम क्यों हटा, योजना को मांग आधारित से आपूर्ति आधारित ढांचे में क्यों नहीं बदला, राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ाने के साथ-साथ केंद्र का पूर्ण नियंत्रण क्यों थोपा।
विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम राज्य सरकारों की स्वायत्तता और ग्रामीण रोजगार अधिकारों पर हमला है।
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा, कर्नाटक में नई ग्रामीण रोजगार योजना लागू करने के लिए अगले 5 साल में राज्य सरकार को करीब 20,000 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। कर्नाटक ने तो इसे कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान भी किया है।
रिसर्च में दावा: राज्यों को 17 हजार करोड़ का लाभ
एसबीआई रिसर्च के एक पेपर के अनुसार, वीबी‑जी राम जी एक्ट लागू होने पर राज्यों को 17,000 करोड़ रु. का लाभ होने का अनुमान है। यह राशि पिछले 7 साल के मनरेगा आवंटन से तुलना करके निकाली गई है। नए ढांचे में केंद्र और राज्यों के बीच निधि का वितरण मानक आधार (नॉर्मेटिव असेसमेंट) पर होगा, जिसमें समानता और दक्षता को ध्यान में रखा गया है। यह नया मॉडल राज्यों को वित्तीय मदद के साथ रोजगार की गारंटी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
केंद्र सरकार ने योजना के ये फायदे बताए