उर्वरकों के प्रयोग से खेती हो रही लाभप्रद, कम लागत में बेहतर उत्पादन से बढ़ा भरोसा

Updated on 08-06-2026 02:38 PM

अम्बिकापुर,  कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल रही है। नैनो उर्वरकों का उपयोग भी ऐसी ही एक पहल है, जिसने किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने का अवसर दिया है। सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम पसेना निवासी प्रगतिशील किसान गोविंद कुमार बेहरा इसका एक सफल उदाहरण हैं। लगभग पौने अठारह एकड़ कृषि भूमि में खेती करने वाले श्री बेहरा पिछले दो से तीन वर्षों से नैनो यूरिया-डीएपी का भी प्रयोग किया है। उनके अनुभव बताते हैं कि यह तकनीक किसानों के लिए सुविधाजनक, किफायती और प्रभावी साबित हो रही है।

नैनो उर्वरकों की गुणवत्ता और सुगम परिवहन

कृषक श्री बेहरा बताते हैं कि प्रारंभ में उन्होंने नैनो उर्वरकों का प्रयोग परीक्षण के तौर पर किया था, लेकिन इसके परिणामों ने उनका भरोसा बढ़ा दिया। उन्होंने स्वयं अपने खेतों में नैनो यूरिया-डीएपी का उपयोग किया और पाया कि फसलों की वृद्धि पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा। विशेष रूप से धान की फसल में उन्हें बेहतर परिणाम प्राप्त हुए। फसल के उत्पादन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला।

लागत में कमी और फसलों पर शानदार परिणाम

उन्होंने बताया कि पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में नैनो उर्वरकों का सबसे बड़ा लाभ इसकी सुविधा है। जहां पहले भारी-भरकम उर्वरक बोरियों को खेत तक पहुंचाने और भंडारण में कठिनाई होती थी, वहीं नैनो उर्वरक कम मात्रा में उपलब्ध होने के कारण आसानी से परिवहन किए जा सकते हैं। इससे किसानों का श्रम और समय दोनों बचते हैं। साथ ही पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इसकी लागत भी कम पड़ती है, जिससे खेती का कुल खर्च घटता है।

नैनो यूरिया-डीएपी का अन्य फसलों में उपयोग

गोविंद कुमार बेहरा के अनुसार उनके खेतों में धान के अलावा खीरा, बैंगन जैसी सब्जी फसलें भी ली जाती हैं। विभिन्न फसलों में आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से उन्हें खेती को अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बनाने में मदद मिली है। उनका कहना है कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्रभावी ढंग से प्राप्त होते हैं, जिससे फसलों की गुणवत्ता और विकास में सुधार देखने को मिलता है।

वे बताते हैं कि नैनो उर्वरकों का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि यह भूमि की उर्वरकता शक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाते। लगातार उपयोग के बावजूद उन्हें अपनी भूमि की गुणवत्ता पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव दिखाई नहीं दिया है। इसके विपरीत, वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि वे इसे भविष्य की टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए उपयोगी मानते हैं।

किसानों से अपील: मिट्टी बचाएं, नैनो यूरिया अपनाएं

कृषक श्री बेहरा का मानना है कि नैनो यूरिया खेतों की मिट्टी के लिए बिल्कुल भी नुकसानदायक नहीं है। इसका इस्तेमाल करने से उन्हें इसके प्रत्यक्ष और सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। उन्होंने क्षेत्र के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे भी नैनो यूरिया का अधिक से अधिक उपयोग करें, जिससे न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि खेतों की मिट्टी भी लंबे समय तक सुरक्षित और उपजाऊ बनी रहेगी।



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