किसान, व्यापारी या थोक विक्रेता... सब्जियों की बढ़ती कीमत से किसे सबसे ज्यादा फायदा? समझ लीजिए पूरा गणित

Updated on 07-10-2024 12:51 PM

नई दिल्ली: इस समय फल और सब्जियों की कीमत आसमान छू रही है। खुदरा बाजार में टमाटर 100 रुपये किलो मिल रहा है। आलू भी 40 रुपये किलो है। दुकानदार धनिया 30 रुपये का 50 ग्राम दे रहे हैं। प्याज भी 60 से 80 रुपये किलो मिल रही है। केले का भाव 80 रुपये दर्जन है। सेब भी 100 रुपये किलो पार है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि फलों और सब्जियों की बढ़ती कीमत से क्या किसानों को ज्यादा फायदा हो रहा है या व्यापारी या थोक विक्रेताओं को?

महंगाई पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक फलों और सब्जियों की बढ़ती कीमत से किसानों को बहुत ज्यादा लाभ नहीं मिलता। रिपोर्ट के मुताबिक खुदरा बाजार से ग्राहक जिस कीमत पर फल या सब्जी खरीदता है, उसका एक तिहाई हिस्सा ही किसान की जेब में जाता है। यानी अगर आपने 100 रुपये के एक किलो टमाटर खरीदे तो किसान को सिर्फ 33 रुपये ही मिलेंगे। बाकी का हिस्सा थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं में बंट जाता है।


किसानों को इनमें ज्यादा प्रॉफिट


कुछ चीजें ऐसी हैं जिनमें किसानों को ज्यादा पैसा मिलता है। जब इन चीजों को ग्राहक बाजार से खरीदता है तो उसकी कीमत का इतनी हिस्सा किसानों को मिलता है:


सब्जियां महंगी होने से किसानों को फायदा नहीं


हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक साल में ऐसे कई मौके आते हैं जब टमाटर, प्याज और आलू (TOP) की कीमत बढ़ जाती है। इसके प्रमुख कारण कम या ज्यादा बारिश होना, तापमान कम या ज्यादा होना आदि होते हैं। हालांकि इस बढ़ती कीमत से किसानों को कोई लाभ नहीं होता। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार किसानों को टमाटर के लिए उपभोक्ता मूल्य का लगभग 33%, प्याज के लिए 36% और आलू के लिए 37% ही मिलता है।

फलों पर भी लाभ नहीं


रिपोर्ट में फलों के लिए भी आंकड़े दिए गए हैं। इसमें अनुमान लगाया गया है कि घरेलू बाजार में किसानों को केले के लिए अंतिम कीमत का 31%, अंगूर के लिए 35% और आम के लिए 43% मिलता है।

स्टडी के मुताबिक बैलेंस शीट दृष्टिकोण के माध्यम से मूल्य वृद्धि का पूर्वानुमान लगाना संभव है। रिसर्च में उन तरीकों का भी सुझाव दिया गया है जिनसे नीति निर्माता इन मूल्य वृद्धि को सुचारू कर सकते हैं।

कीमत पर लगाम के लिए बताए ये उपाय


  • टमाटर, प्याज और आलू की कीमत को रोकने के लिए स्टडी में कुछ चीजों की सिफारिश की गई है। इनमें निजी मंडियों का विस्तार करने, ई-एनएएम का लाभ उठाने, किसान समूहों को बढ़ावा देने और वायदा कारोबार को फिर से शुरू करने के बारे में कहा गया है।

  • अधिक कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का निर्माण करने, सौर ऊर्जा से चलने वाले भंडारण को बढ़ावा देने, प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और प्रोसेस्ड TOP प्रोडक्ट के बारे में उपभोक्ताओं को जागरुक करने का भी सुझाव दिया गया है।

  • स्थिर आपूर्ति और कीमतों को सुनिश्चित करने के लिए बेहतर फसल की किस्मों और पॉलीहाउस टमाटर की खेती के माध्यम से प्रोडक्शन में सुधार की भी सिफारिश की गई है।

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