कोलार से कोलार बांध जाने वाली सड़क के किनारे ही स्थित है झिरी। यह पौराणिक नदी बेतवा के उद्गम के लिए प्रसिद्ध है। दावे तो उद्गम स्थल को पर्यटन स्थल बनाने के किए गए, लेकिन आज तक तस्वीर बदली नहीं है। इसी झिरी के एकीकृत माध्यमिक शाला में बने मतदान केंद्र पर मिले रनर दौलत गुर्जर। दरअसल झिरी रातापानी वन्य क्षेत्र के अंदर आता है। यहां 604 मतदाता दर्ज हैं। जैसे-जैसे मतदान होते जा रहा था, रनर दौलत प्रत्येक तीन घंटे पर मतदान का आंकड़ा लेकर करीब एक किलोमीटर दूरी पर एक जगह जाते, जहां नेटवर्क मिल जाता है और वे वहां से मतदान का आंकड़ा रायसेन जिला मुख्यालय भेजते।
280 मतदाताओं का केंद्र, 12 बजे के पहले 63 प्रतिशत मतदान
रातापानी वन्य क्षेत्र में स्थित बहेड़ा टोला गांव में 280 मतदाता हैं, जिनमें से 40 ग्रामीण मजदूरी के लिए गुजरात गए हुए हैं। शेष मतदाता ऐसे ग्रामीण थे जो काम पर जाने के पहले ही मतदान की कतार में लग गए और तेजी से मतदान हुआ। यहां 10 बजे के बाद इक्का-दुक्का मतदाताओं के आने का क्रम जारी था। 11.30 बजे तक यहां 63 प्रतिशत मतदान हो गया था और मतदान दल के आधे से अधिक कर्मी आंगन में बैठकर भोजन कर रहे थे, यहीं मिला दिनेश जो वोट डालने के बाद आराम से कुर्सी पर बैठा सुस्ता रहा था, पूछने पर भोली मुस्कान के साथ बोला, देरी हो गई, भुनसारे ही जंगल में अचार बीनने चले गए थे। अब वोट डाल दिया है तो आराम कर रहे हैं....।
दो संसदीय क्षेत्रों वाला गांव
इसी क्षेत्र में आंवलीखेड़ा पंचायत के अंदर राबियाबाद गांव से लगा बावड़ीखेड़ा टोला ऐसा है जिसके आधे निवासी भोपाल संसदीय क्षेत्र तो विदिशा में मतदान करते हैं। दरअसल बावडीखेड़ा गांव आधा भोपाल तो आधा सीहोर के आष्टा में आता है। यहां करीब 70 मतदाता है, इनमें से आधे मतदान करने राबियाबाद, कठौतिया आए तो हैंडपंप की सीमा के उस पार रहने वाले आंवलीखेड़ा गए और विदिशा क्षेत्र के लिए वोट डाला, गांव सुनसान पड़ा था क्योंकि अधिकतर लोग यहां-वहां गए हुए थे।