
इस दौरान उनका सामना नक्सलियों से हुआ। नक्सलियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी, इस दौरान आशीष शर्मा को 3 गोली लगी थी। इस हालत में भी वे आगे बढ़कर अपनी टीम को लीड करते रहे और जवाबी फायरिंग की।
हालांकि इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। उनकी नेतृत्व में जवाबी कार्रवाई के बाद नक्सली अपना सामान, राशन पानी सब छोड़कर भाग गए।
अब जानिए पूरी कहानी
डोंगरगढ़-बालाघाट का जंगल नक्सलियों के लिए सालों से एक सुरक्षित ठिकाना रहा है, जहां दबाव बढ़ने पर नक्सली छिपते हैं, पुनर्गठित होते हैं और मौका मिलते ही सुरक्षा बलों पर हमला करते हैं।
18 और 19 नवंबर की दरमियानी रात कुरझेर-बोरतालाब के जंगल में तलाशी अभियान के दौरान निरीक्षक आशीष शर्मा की पार्टी का सामना नक्सलियों से हो गया और दोनों तरफ से गोलीबारी हुई।
मुठभेड़ के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी आशीष शर्मा ने अपनी टीम को निर्देश दिए, तब तक गोलियां चलती रहीं। उनकी टीम उन्हें तुरंत जंगल से बाहर लेकर आई, अस्पताल के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, एयरलिफ्ट तक की व्यवस्था की गई, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
इंस्पेक्टर की जनवरी में होनी थी शादी
आशीष शर्मा मूल रूप से नरसिंहपुर जिले के रहने वाले थे। कुछ समय पहले हॉक फोर्स ने बालघाट जंगल में चार नक्सलियों को ढेर किया था। इसके बाद उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर निरीक्षक बनाया गया। बताया जा रहा है आशीष शर्मा की शादी तय हो गई थी। दो महीने बाद जनवरी 2026 में शादी होनी थी।
शहीद जवान आशीष शर्मा की उपलब्धि
आशीष शर्मा हॉक फोर्स के उन सक्रिय अधिकारियों में से थे जिनकी कार्रवाइयों ने नक्सली नेटवर्क को कई बार तोड़ा था और वे नक्सलियों के लिए एक जाना-पहचाना नाम थे।
उनकी यही उपलब्धियां थीं कि सुरक्षा बलों में उनका नाम सम्मान से लिया जाता था और नक्सली संगठन उन्हें खुली चुनौती मानते थे। आशीष कई बड़े नक्सलियों का एनकाउंटर कर चुके है।