खालिस्तानियों को अब घास नहीं डालेगा कनाडा, ट्रंप ने टैरिफ लगाया तो समझ में आई भारत की अहमियत, रिश्ता सुधार रहे PM कार्नी

Updated on 17-11-2025 01:52 PM
ओटावा: कनाडा सरकार ने धीरे धीरे खालिस्तानी अलगाववादियों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। जस्टिन ट्रूडो ने अपने कार्यकाल के दौरान खालिस्तानियों का समर्थन करके भारत और कनाडा के संबंध काफी खराब कर दिए थे। जस्टिन ट्रूडो ने तो भारत पर कनाडा में रहने वाले खालिस्तानी आतंकवाद हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोप लगाए थे। हालांकि उन्होंने भारत पर लगाए गये आरोपों को लेकर कोई भी सबूत पेश नहीं किया। ट्रूडो ने कनाडा से भारतीय डिप्लोमेट्स को निकाल दिया, जिसके बाद भारत ने भी कनाडाई डिप्लोमेट्स को देश से निकालकर वैसा ही जवाब दिया था।

लेकिन अब जब डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ लगातार कनाडा की इकोनॉमी को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया है, तो कनाडा को भारत की अहमियत समझ आ रही है। कनाडा का राजनीतिक प्रतिष्ठान धीरे-धीरे खालिस्तानी अलगाववादियों से खुद को अलग करने लगा है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले दिनों कई ऐसे फैसले लिए हैं, या संकेत दिए हैं, जिससे पता चलता है कि कनाडा की लिबरल सरकार, भारत के साथ संबंधों को फिर से बनाने और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।खालिस्तानियों से कनाडा सरकार ने बनाई दूरी
आपको बता दें कि पिछले कई दशकों से कनाडा, खालिस्तान समर्थकों के लिए प्रमुख गंतव्य स्थल रहा है। धीरे धीरे वोट बैंक के लिए कनाडा की सरकारों ने खुलकर खालिस्तानियों का समर्थन शुरू कर दिया था। लेकिन जस्टिन ट्रूडो ने सभी हदें पार कर दी। कनाडा की राजनीति को खालिस्तान वोट बैंक ने काफी प्रभावित किया है और हर राजनीतिक दलों ने सत्ता में आने के लिए खालिस्तान समर्थकों को लुभाने की कोशिश की है, जिससे भारत के साथ संबंधों पर गंभीर असर पड़ा है। खालिस्तान समर्थकों ने राजनीतिक मंच का फायदा भारत के खिलाफ प्रचार करने और प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए उठाया है।
सूत्रों के हवाले से सीएनएन-न्यूज18 ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, भारत में 2026 में होने वाले एआई शिखर सम्मेलन को भारत और कनाडा के संबंध को नये सिरे से स्थापित करने और उन्हें फिर से पटरी पर लाने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रहे हैं। लिबरल कॉकस को संबोधित करते हुए, उन्होंने कथित तौर पर अपने सहयोगियों को खालिस्तानी नेताओं या संबंधित समूहों से कोई संपर्क न रखने का निर्देश दिया। इससे पहले कंजर्वेटिव नेता स्टीफन हार्पर ने भी सार्वजनिक रूप से कनाडाई राजनीतिक दलों से खालिस्तानी अलगाववादी संगठनों से संबंध तोड़ने का आह्वान किया था
भारत से संबंध सुधार रहे हैं पीएम मार्क कार्नी?
आपको बता दें कि अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कनाडा पर पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और बाद में 10 प्रतिशत और बढ़ाकर उसे 35 प्रतिशत कर दिया था। इससे कनाडा की इकोनॉमी को गहरा धक्का लगा है। कनाडा अब अमेरिका के अलावा दूसरे बाजारों की तलाश कर रहा है और दुनिया में भारत से बड़ा कोई और बाजार है नहीं। चीन है, लेकिन चीन अपने सामान खुद बनाता है। कनाडा से आने वाले ऊर्जा पर भी ट्रंप ने 10 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है। इसीलिए कनाडा को अब भारत की अहमियत समझ में आ रही है।
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने हाल ही में भारत का दौरा किया था और उनकी सहयोगी मनिंदर सिद्धू के जल्द ही नई दिल्ली आने की उम्मीद है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए कनाडा गए थे। वहीं, भारत सरकार के सूत्रों के हवाले से सीएनएन-न्यूज18 ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नई दिल्ली और ओटावा नियंत्रित, मुद्दा-विशिष्ट बातचीत के माध्यम से आपसी विश्वास की फिर से बहाली की कोशिश कर रहे हैं। कनाडा की अपनी खुफिया एजेंसी, कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (सीएसआईएस) ने बार-बार चेतावनी दी है कि सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी समूह धमकी अभियानों और वित्तीय नेटवर्क में शामिल हैं। इसीलिए कनाडा अब ये कोशिश कर रहा है कि खालिस्तानियों को कोई भी राजनीतिक स्थल नहीं दी जाए।

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