ब्रिक्‍स की नई करेंसी...अलविदा डॉलर, मोदी-पुतिन की मुलाकात के बाद रॉबर्ट क‍ियोसाकी का यह दावा कैसा?

Updated on 08-12-2025 01:50 PM
नई दिल्‍ली: जाने-माने निवेशक और 'रिच डैड पुअर डैड' के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने अमेरिकी डॉलर के भविष्य को लेकर अपनी पुरानी चेतावनियों को और मजबूत किया है। उन्होंने निवेशकों से क्रिप्टोकरेंसी और कीमती धातुओं की ओर रुख करने की अपील की है। यह सलाह ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में वैकल्पिक वित्तीय प्रणालियों पर चर्चा तेज हो गई है। कियोसाकी ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्स' पर दावा किया कि ब्रिक्स देशों ने गोल्‍ड बैक्‍ड यानी 'सोने से समर्थित' करेंसी की घोषणा की है ज‍िसे 'यूनिट' कहा जा रहा है। हालांकि, यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि ब्रिक्स देशों की ओर से किसी भी नई मुद्रा की घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है। यह केवल एक विचार या रिसर्च का विषय है। इसलिए, अमेरिकी डॉलर के बारे में कियोसाकी की चिंताएं अभी अटकलों पर आधारित हैं। उन्होंने अपने फॉलोअर्स को 'हाइपरइन्फ्लेशन' के जोखिम के प्रति आगाह किया, जो अमेरिकी डॉलर के मूल्य को खत्म कर सकता है।

कियोसाकी ने कहा, 'ब्रिक्स: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका ने 'यूनिट' - एक गोल्‍ड बैक्‍ड (सोने से समर्थित) 'मनी' - की घोषणा की है। अलविदा अमेरिकी डॉलर!... मेरा अनुमान है कि अमेरिकी डॉलर के बचतकर्ता सबसे बड़े नुकसान में रहेंगे।' उन्होंने सोने, चांदी, बिटकॉइन और ईथर को आने वाली अस्थिरता के खिलाफ सबसे अच्छा बचाव बताया।

क‍िसी भी ब्र‍िक्‍स देश ने नहीं लॉन्‍च की है ऐसी करेंसी

हालांकि, कियोसाकी के दावों के उलट किसी भी ब्रिक्स सदस्य देश ने आधिकारिक तौर पर सोने से समर्थित मुद्रा लॉन्च नहीं की है। वरिष्ठ अधिकारियों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि निकट भविष्य में ऐसी किसी भी शुरुआत की उम्मीद नहीं है। हकीकत यह है कि डॉलर-प्रधान प्रणाली के बाहर व्यापार को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से एक सोने से जुड़ी भुगतान प्रणाली विकसित करने पर राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। इसे कभी-कभी अनौपचारिक रूप से 'यूनिट' कहा जाता है। इस विचार का लक्ष्य ब्रिक्स देशों के विशाल सोने के भंडार का लाभ उठाना और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव करना है। लेकिन, लिक्विडिटी, सीमा पार समन्वय और विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में एक एकीकृत प्रणाली डिजाइन करने की जटिलता जैसी महत्वपूर्ण बाधाएं अभी भी मौजूद हैं।

2024 के अंत में अटकलें हुई थीं तेज

2024 के अंत में अटकलें तब तेज हुईं जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को कजान शिखर सम्मेलन के दौरान 'ब्रिक्स बैंकनोट' का एक प्रोटोटाइप पकड़े हुए देखा गया। इससे एक प्रस्‍ताव‍ित लॉन्च की अफवाहें उड़ीं। बाद में ब्रिक्स अधिकारियों ने साफ किया कि वह नोट केवल प्रतीकात्मक था और किसी भी तत्काल मुद्रा परिचय का संकेत नहीं था। 2024 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुतिन ने कहा कि उनका लक्ष्य डॉलर को पूरी तरह से अस्वीकार करना नहीं है, बल्कि उसके 'हथियारीकरण' का मुकाबला करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राथमिकता वैकल्पिक रास्ते बनाना है, जैसे कि स्थानीय मुद्रा निपटान और गैर-स्विफ्ट (SWIFT) भुगतान नेटवर्क, ताकि सदस्य राष्ट्र एकतरफा प्रतिबंधों के प्रति संवेदनशील न हों। पुतिन ने कहा था, 'हम डॉलर को मना नहीं कर रहे हैं, उससे लड़ नहीं रहे हैं, लेकिन वे हमें उसके साथ काम करने नहीं देते हैं तो हम क्या कर सकते हैं? तब हमें अन्य विकल्पों की तलाश करनी होगी।'

हाल में मोदी और पुत‍िन की हुई मुलाकात

बाद में पुतिन ने सावधानी पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि एक सामान्य मुद्रा में जल्दबाजी करने से 'गंभीर गलतियां' हो सकती हैं। यूरोपीय संघ की ओर से यूरो की शुरुआत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कई देश आर्थिक रूप से तैयार नहीं थे। इसके चलते यूरोजोन में तनाव पैदा हुआ। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब पुतिन ने इस सप्ताह भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें कीं। इससे ब्रिक्स गुट के भीतर विकसित हो रहे वित्तीय और भू-राजनीतिक गठबंधनों पर वैश्विक ध्यान गया।

कियोसाकी लंबे समय से सोना, चांदी और प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में निवेश की वकालत करते रहे हैं। वह अक्सर अमेरिकी वित्तीय प्रणाली में गंभीर गिरावट की भविष्यवाणी करते हैं। हाल के महीनों में उन्होंने बार-बार चांदी को 'सबसे अच्छा और सबसे सुरक्षित' विकल्प बताया है। साथ ही वैश्विक मौद्रिक अनिश्चितता के बीच क्रिप्टो संपत्तियों को मूल्य के आवश्यक भंडार के रूप में प्रस्तुत किया है। जबकि उनकी ताजा चेतावनी उनके पिछले संदेशों के अनुरूप है, विश्लेषकों का कहना है कि कियोसाकी के दावे अक्सर भू-राजनीतिक वास्तविकताओं से आगे निकल जाते हैं, खासकर वैश्विक मौद्रिक सुधार के जटिल और धीमी गति वाले क्षेत्र में।

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