
लोस चुनाव के बीच भाजपा को बड़ा झटका लगा है। देश की सबसे बड़ी को-ऑपरेटिव संस्था इंडियन फार्मर्स फर्टीलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) नई दिल्ली के डायरेक्टर पद का चुनाव भाजपा हार गई। कांग्रेस से जुड़े ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने भाजपा के कौशल शर्मा को 5 वोटों से हराया। इफको में मप्र और छग से एकमात्र डायरेक्टर चुना जाता है।
सिसोदिया को 17 और कौशल को 12 वोट मिले। पूर्व मंत्री गोविंद सिंह के बेटे व निवर्तमान डायरेक्टर अमित सिंह को 8 वोटों से संतोष करना पड़ा। डायरेक्टर का चुनाव जीतने वाले कांग्रेस के सिसोदिया उज्जैन से हैं, जो सीएम डॉ. मोहन यादव का गृह जिला है।
सूत्रों का कहना है कि सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग के ओएसडी संजय मोहन भटनागर सभी वोटरों को लेकर दिल्ली गए थे। मप्र-छग में कुल 41 वोटर हैं। चार (एक छग और तीन मप्र) लोकसभा चुनाव ड्यूटी की वजह से वोट डालने दिल्ली नहीं गए थे।
गुजरात के सिंघानी बने अध्यक्ष : पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी व गुजरात के दिलीप सिंघानी शुक्रवार को इफको के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं। डायरेक्टर का चुनाव 9 मई को हुआ है।
इफको क्यों : हर साल कम से कम 25 लाख बोनस मिलता है, देश-दुनिया की मुफ्त में सैर होती है
इफको को लेकर बड़े नेताओं के बीच सियासत को इस बात से समझा जा सकता कि हर साल की एनुअल जनरल बॉडी मीटिंग (एजीएम) में कम से कम 25 लाख रुपए बोनस के मिलते हैं।
देश-दुनिया में कहीं भी जाने पर मुफ्त यात्रा व सुविधाएं हैं। हर माह होने वाली मीटिंग में आने-जाने के खर्च के साथ कम से कम एक लाख रुपए मिलता है। साल में 10 से 15 विदेश यात्राएं होती हैं। इफको में कुल 21 डायरेक्टर होते हैं। यानी हर प्रदेश से एक प्रतिनिधित्व रहता है। कौशल शर्मा ग्वालियर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं।
तैयारी ऐसी... वीडी के निर्देश पर प्रत्याशी चुना
छत्तीसगढ़ और मप्र के अलग-अलग जगहों से गुपचुप तरीके से 28 वोटरों को इंदौर बुलाकर फ्लाइट से दिल्ली भेजा गया। प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री हितानंद के कहने पर प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने वोटिंग से 10 दिन पहले 29 अप्रैल को कौशल शर्मा को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित करने का पत्र जारी किया। वोटरों को एमपी भवन में ठहराया गया और वोटिंग के दिन लाइन लगाकर वोट डलवाए गए थे।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कौशल शर्मा पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के करीबी हैं। कौशल को प्रत्याशी इसलिए घोषित किया था, क्योंकि पूर्व केंद्रीय नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी अरुण सिंह तोमर व छग के शशिकांत द्विवेदी ने भी चुनाव की तैयारी की थी।