छोटे शहरों में भी पूरे हो रहे बड़े सपने, होमटाउन में काम का बढ़ा चलन
Updated on
24-05-2024 01:36 PM
नई दिल्ली: जब भी Emaar इंडिया किसी छोटे शहर में नया प्रोजेक्ट शुरू करता है, तो कंपनी की मुख्य एचआर अधिकारी माधुरी मेहता के लिंक्डइन अकाउंट पर कई लोगों के मेसेज आने लगते हैं। ये ऐसे प्रोफेशनल होते हैं, जो अपने होमटाउन में नौकरी की तलाश कर रहे होते हैं। मेहता का कहना है कि ये लोग बहुत टैलेंटेड लोग हैं। इनमें कई ऐसे प्रोफेशनल हैं जो अपने घरों की ओर वापस लौटना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी के इंदौर, जयपुर, मोहाली और लखनऊ जैसे शहरों में कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। यहां कंपनी भारी संख्या में नौकरी दे रही है। इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भर्ती करने वालों का कहना है कि छोटे शहरों (टियर 2 और 3) में सभी तरह के कामों के मौके बढ़ रहे हैं। लोग इनमें काम करने के लिए उत्सुक हैं। बड़े शहरों में रहने की बढ़ती लागत और सुविधाओं की कमी के कारण लोग छोटे शहरों में जाने को तैयार हैं। दूसरी तरफ कंपनियों को इन छोटे शहरों में सस्ती जमीन, कम सैलरी और आसानी से कर्मचारी मिल जाते हैं। इससे कंपनियों को भी मुनाफा होता है।
रिक्रूटिंग कंपनी Xpheno ने ET को जो डेटा दिया उसके मुताबिक, लोकप्रिय नौकरी साइटों और पोर्टल्स पर छोटे शहरों में (टियर 2/3) व्हाइट कॉलर नौकरियों के लिए खुले पदों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 41% बढ़ी है। 2021 में जॉब के मौकों में बहुत तेजी आई थी। हालांकि इसमें थोड़ी कमी आई है। लेकिन भुवनेश्वर, देहरादून, सोलापुर और मैसूर जैसे शहरों में पिछले साल के मुकाबले नौकरी के मौके 3 गुना से 8 गुना तक बढ़े हैं। जानकारी के मुताबिक, छोटे शहरों में नौकरी देने वाली कंपनियों में बजाज फिनसर्व, आईबीएम, एक्सेंचर, इन्फोसिस, जेनपैक्ट, वोडाफोन आइडिया, एयरटेल, इन्फोसिस बीपीएम, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एचडीएफसी शामिल हैं।
'लोकल लोगों को भी मिलता है मौका'
कंपनियां सिर्फ उन लोगों को नौकरी नहीं दे रही हैं, जो अपने घरों में वापस आना चाहते हैं। इनके अलावा स्थानीय लोगों को भी मौका मिल रहा है। IBM India/साउथ एशिया के HR हेड, थिरुक्कूमारन नागराजन ने कहा कि हम छोटे शहरों से लोगों को बड़े शहरों में नौकरी देने की जगह, पूरे देश में प्रतिभाओं के पास अपने ऑफिस ले जा रहे हैं। कंपनी ने गांधीनगर, भुवनेश्वर, कोच्चि, मैसूर और कोयम्बटूर जैसे शहरों में अपने दफ्तर खोले हैं।
'घरों के पास काम करने का फायदा'
नागराजन ने कहा कि इन छोटो शहरों में आईबीएम को बड़ी संख्या में लोगों से नौकरी के लिए आवेदन मिलते हैं। साथ ही, कर्मचारियों को अपने घरों के पास काम करने का फायदा मिलता है, जिससे उनका काम और जीवन संतुलित रहता है। एक्सपर्ट का कहना है कि कि कई राज्य और शहरों में पिछले कई सालों से IT पार्क और अन्य बुनियादी ढांचा बनाकर निवेश और नौकरी के अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन कोविड लॉकडाउन के दौरान घर से काम करने के कारण इन जगहों को इफेक्टिव वर्क सेंटर के तौर पर देखा गया है।
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