बाहुबली धनंजय सिंह बरेली जेल से रिहा:कहा- फर्जी मुकदमे में सजा हुई, जौनपुर पहुंचने से पहले पत्नी नामांकन करने पहुंचीं

Updated on 01-05-2024 01:03 PM

बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह बरेली सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। बुधवार सुबह जेल से निकलते ही उन्होंने कहा- फर्जी मुकदमे में सजा हुई थी, हाईकोर्ट ने मुझे जमानत दी है। मेरी पत्नी चुनाव लड़ रही हैं, सीधे अपने क्षेत्र में प्रचार करने जाऊंगा। धनंजय को जौनपुर की MP-MLA कोर्ट ने 6 मार्च को 7 साल की सजा सुनाई थी। 57 दिन से वह जेल में बंद थे।

धनंजय को 4 दिन पहले शनिवार को जौनपुर से बरेली जेल शिफ्ट किया गया। उसी दिन धनंजय को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। कोर्ट का यह फैसला तब आया था, जब जौनपुर पुलिस धनंजय को लेकर बरेली के लिए निकल चुकी थी। रास्ते में ही थे, तभी उनकी जमानत की खबर आई थी।

धनंजय की जमानत का आदेश मंगलवार शाम बरेली जेल पहुंच गया था। सुबह करीब 14 गाड़ियों में धनंजय के समर्थक जेल पहुंचे। लेकिन पुलिस ने बैरियर लगाकर उनको जेल से दूर रोक दिया।

पत्नी अचानक नामांकन करने पहुंचीं कलेक्ट्रेट
जौनपुर से बसपा प्रत्याशी श्रीकला रेड्डी बुधवार को अचानक नामांकन करने कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उनके साथ कुछ ही समर्थक नजर आए। पहले धनंजय सिंह के मीडिया प्रभारी अशोक सिंह ने कहा था- धनंजय सिंह के जौनपुर आने के बाद 4 मई को श्रीकला रेड्डी नामांकन करेंगी। हालांकि, कुछ देर बाद ही श्रीकला नामांकन करने पहुंच गई। ऐसा क्यों किया? इसकी वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

इंजीनियर अपहरण केस में 7 साल की सजा
धनंजय को इंजीनियर अभिनव सिंघल के अपहरण-रंगदारी मामले में MP-MLA कोर्ट ने 6 मार्च को 7 साल की सजा सुनाई थी। नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल ने 10 मई 2020 को जौनपुर के लाइन बाजार थाने में धनंजय सिंह और उनके साथियों के खिलाफ रंगदारी, अपहरण की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। इंजीनियर ने कहा था- धनंजय अपने साथी विक्रम के साथ पिस्टल लेकर आया और जबरन रंगदारी मांगी।

धनंजय ने MP-MLA कोर्ट के फैसले के खिलाफ धनंजय ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल करते हुए सजा पर रोक लगाने और जमानत की मांग की थी। इसमें उन्होंने दावा किया था कि उनको राजनीतिक साजिश का शिकार बनाया गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में धनंजय को जमानत दे दी। हालांकि, 7 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

मेरे पति की हत्या हो सकती है: श्रीकला रेड्डी

​​​​​​​शनिवार को ही धनंजय सिंह की पत्नी और जौनपुर से बसपा प्रत्याशी श्रीकला रेड्डी ने प्रेस कांफ्रेंस की थी। उन्होंने कहा था-मेरे पति की हत्या हो सकती है। मेरे पति के ऊपर जिन लोगों ने एके-47 से जानलेवा हमला किया था। वे लोग सत्ता से सांठ-गांठ करके उनकी हत्या का प्रयास कर सकते हैं। उन्हें किसी और फर्जी मुकदमे में फंसा सकते हैं। क्योंकि, मेरे पति एक मामले में गवाह है, जिसकी गवाही से आरोपियों को सजा होनी तय है। आज मुझे और मेरे बच्चों को जान का खतरा है। हमें सुरक्षा दी जानी चाहिए। हालांकि, श्रीकला ने किसी का नाम नहीं लिया था।

धनंजय जौनपुर में बिगाड़ सकते हैं NDA-PDA के समीकरण
धनंजय के जेल से बाहर आने के बाद जौनपुर लोकसभा का चुनावी समीकरण बदलने की संभावना है। धनंजय की पत्नी श्रीकला बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। जबकि भाजपा ने यहां से कृपाशंकर सिंह को टिकट दिया है। सीनियर जर्नलिस्ट रतनमणि लाल बताते हैं कि 2024 चुनाव के लिए पिछले पांच साल से धनंजय तैयारी कर रहे थे। चुनाव से ठीक पहले ऐनवक्त पर उनको सजा हो गई। धनंजय के बाहर आने का फायदा उनकी पत्नी को मिलना तय है।

धनंजय पिछले 22 साल से जौनपुर की राजनीति में सक्रिय हैं। ब्लॉक से लेकर जिला पंचायत तक में उनके समर्थक हैं। सत्ता किसी की भी हो, पर उनके समर्थक छोटे-बड़े राजनीतिक पदों पर काबिज होते रहे हैं। धनंजय के बाहर आने के बाद वो चुनाव में लगेंगे। भाजपा प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह जौनपुर के मूल निवासी जरूर हैं, लेकिन 45 साल से महाराष्ट्र की राजनीति की है। जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ कमजोर है। 27 साल की उम्र में पहली बार धनंजय सिंह विधायक बने

धनंजय सिंह ने 27 साल की उम्र में जौनपुर की रारी विधानसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा और जीता। 2007 में इसी सीट से जेडीयू के टिकट पर जीते। 2009 में बसपा के टिकट पर सांसद बने। वे अब तक 2 बार विधायक और 1 बार सांसद रह चुके हैं। 2011 में उन्हें बसपा से निकाला गया। 2012 में धनंजय की पहली पत्नी जागृति को मल्हनी विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाया लेकिन हार गए।

धनंजय ने 2017 में निषाद पार्टी के टिकट पर 2020 में निर्दलीय और 2022 में जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा। तीनों बार हार का सामना करना पड़ा। 2014 में धनंजय ने लोकसभा चुनाव निर्दलीय लड़ा, हार गए। 2019 में वे चुनाव नहीं लड़े। 2024 में चुनाव की पूरी तैयारी थी लेकिन उन्हें 7 साल की जेल हो गई। इससे वे चुनाव लड़ने में अयोग्य हो गए। अब पत्नी को बसपा ने टिकट दिया है।

धनंजय सिंह पर 10 मुकदमे पेंडिंग

15 साल की उम्र में पहला मुकदमा धनंजय पर दर्ज किया गया, तब से अब तक धनंजय सिंह पर पहले 43 मुकदमे दर्ज हुए थे, जो अब घटकर 10 रह गए हैं। इनमें से 8 केस जौनपुर जिले में दर्ज हैं। जबकि एक केस दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने और एक केस लखनऊ के विभूति खंड थाने में दर्ज है।

कुल 6 मामलों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। 3 मामलों में ही धनंजय पर आरोप तय हो पाए। एक केस में उन्हें अब तक सजा मिली है, जिसमें वे 6 मार्च से जेल में बंद है।



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