चाबहार पोर्ट डील पर अमेरिका की भारत को चेतावनी : कहा- भारत विदेश नीतियों पर खुद फैसला करे

Updated on 14-05-2024 12:01 PM

भारत-ईरान के बीच चाबहार पोर्ट डील साइन होने के बाद अमेरिका ने वॉर्निंग दी है। अमेरिका ने कहा है कि ईरान से व्यापार करने की वजह से भारत पर पाबंदियों का खतरा रहेगा। दरअसल, अमेरिकी विदेश विभाग के उप-प्रवक्ता वेदांत पेटल से सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान चाबहार पोर्ट की डील पर सवाल किया गया।

इस पर जवाब देते हुए पटेल ने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि ईरान और भारत ने चाबहार बंदरगाह से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। विदेश नीतियों और दूसरे देशों के साथ अपने रिश्तों पर भारत खुद फैसले करेगा, लेकिन जो भी देश ईरान के साथ व्यापार में शामिल होगा, उस पर प्रतिबंध लगने का खतरा बना रहेगा।"

भारत को 10 साल के लिए मिला चाबहार पोर्ट
भारत ने सोमवार को ईरान के चाबहार में शाहिद बेहेशती पोर्ट को 10 साल के लिए लीज पर लेने से जुड़ी डील की। इस समझौते के लिए भारत से केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को ईरान भेजा गया था। भारत और ईरान दो दशक से चाबहार पर काम कर रहे हैं। अब पोर्ट का पूरा मैनेजमेंट भारत के पास होगा।

चाबहार पोर्ट के जरिए भारत को अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया से व्यापार करने के लिए नया रूट मिल जाएगा। इससे पाकिस्तान की जरूरत भी खत्म हो जाएगी। यह पोर्ट एक तरह से भारत और अफगानिस्तान को व्यापार के लिए ऑप्शनल रास्ता मुहैया कराएगा।

डील के तहत भारतीय कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) चाबहार पोर्ट में 120 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी। इस निवेश के अलावा 250 मिलियन डॉलर की वित्तीय मदद की जाएगी। इससे यह समझौता करीब 370 मिलियन डॉलर का हो जाएगा।

क्या है चाबहार पोर्ट और भारत के लिए क्यों जरूरी है
भारत दुनियाभर में अपने व्यापार को बढ़ाना चाहता है। चाबहार पोर्ट इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। भारत इस पोर्ट की मदद से ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के साथ सीधे व्यापार कर सकता है। ईरान और भारत ने 2018 में चाबहार पोर्ट तैयार करने का समझौता किया था।

पहले भारत से अफगानिस्तान कोई भी माल भेजने के लिए उसे पाकिस्तान से गुजरना होता था। हालांकि, दोनों देशों में सीमा विवाद के चलते भारत को पाकिस्तान के अलावा भी एक विकल्प की तलाश थी।

चाबहार बंदरगाह के विकास के बाद से अफगानिस्तान माल भेजने का यह सबसे अच्छा रास्ता है। भारत अफगानिस्तान को गेंहू भी इस रास्ते से भेज रहा है। अफगानिस्तान के अलावा यह पोर्ट भारत के लिए मध्य एशियाई देशों के भी रास्ते खोलेगा। इन देशों से गैस और तेल भी इस पोर्ट के जरिए लाया जा सकता है।

चाबहार को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट की तुलना में भारत के रणनीतिक पोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। ग्वादर को बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के तहत चीन विकसित कर रहा है। भारत इस पोर्ट के चीन और पाकिस्तान पर भी नजर रख पाएगा।

ईरान पर अमेरिका ने लगा रखे है प्रतिबंध
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर लगभग सभी व्यापार प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी सरकार ने देश में ईरान की सारी संपत्तियों को भी ब्लॉक कर रखा है। साथ ही अमेरिका ने सहयोगियों देशों को भी ईरान की सहायता करने और हथियार की ब्रिकी करने से रोक रखा है।

अमेरिका ने ये पाबंदियां ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मानवाधिकारों का उल्लंघन और आतंकी संगठनों को समर्थन देने की वजह से लगाई हैं। इसी के साथ ईरान वह देश है जिसपर अमेरिका ने सबसे ज्यादा प्रतिबंध लगाए हुए हैं।

पिछले महीने ईरान ने इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन्स से हमला किया था, जिसके बाद अमेरिका ने उस पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका ने ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, ईरान रक्षा मंत्रालय और ईरानी शासन से जुड़ी मिसाइलें और ड्रोन प्रोडक्शन वाली कंपनीज पर कार्रवाई की थी।

ट्रम्प प्रशासन में भारत को मिली थी छूट
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने भारत को चाबहार पोर्ट की डील को लेकर छूट दी थी। अमेरिका ने कहा था कि ये गतिविधियां अफगानिस्तान के विकास और मानवीय राहत के लिए चल रहे समर्थन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत को यह छूट बंदरगाह के विकास और रेलवे लाइन के निर्माण के लिए ईरान स्वतंत्रता और प्रति-प्रसार अधिनियम 2012( IFCA) के तहत दी गई थी। इस छूट के बाद भारत समेत कई देश बंदरगाह के जरिए सामानों का शिपमेंट और ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों को आयात कर सकते थे।

अमेरिका से तनाव के बावजूद ईरान से तेल खरीदता रहा था भारत
इससे पहले साल 2011 में भी ईरान के परमाणु प्रोग्राम के चलते अमेरिका ने उस पर कई आर्थिक पाबंदियां लगाई थीं। इसके बाद साल 2012 में अमेरिका ने दुनिया के सभी देशों के बैंकों को आदेश दिया था कि वो ईरान की तेल के बदले होने वाली पेमेंट्स को रोक दें।

हालांकि, इस दौरान 7 देशों को छूट दी गई थी, जिनमें भारत भी शामिल था। छूट के बावजूद इन सातों देशों पर दबाव डाला गया था कि ये ईरान से तेल खरीदना कम कर दें, लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया था। उस वक्त जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक ईरान से तेल खरीदने के मामले में भारत ने चीन को पछाड़ दिया था।

भारत पर क्या है प्रतिबंधों के मायने
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार और JNU में प्रोफेसर राजन कुमार कहते है कि भारत ने इस पोर्ट को लेकर अमेरिका से भी बात की है। इसके बाद अमेरिका ईरान पर कोई ऐसा प्रतिबंध नहीं लगाएगा, जिसका असर इस पोर्ट पर पड़े।

अमेरिका चाबहार पोर्ट पर कुछ खास नहीं कर सकता है। इसमें केवल रूस और ईरान ही असर डाल सकते हैं। हालांकि कई सारे देश ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध के कारण इसमें इन्वेस्टमेंट नहीं कर पा रहे हैं।



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