भारत-यूरोप डील से चिढ़ा अमेरिका, स्कॉट बेसेंट बोले- इस कदम से निराशा हुई

Updated on 29-01-2026 01:34 PM
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुई फ्री ट्रेड डील से अमेरिका तिलमिला गया है। उसे यह डील पच नहीं रही है। अब उसने इस ट्रेड डील पर आपत्ति जताई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को भारत के साथ यूरोपीय देशों के व्यापार समझौते पर कड़ी आपत्ति जताई।

सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता अमेरिका के हितों को खतरे में डालता है, तो बेसेंट ने कहा कि देशों को वही करना चाहिए जो उनके लिए सबसे अच्छा हो। लेकिन उन्होंने यूरोप के इस कदम पर 'बहुत निराशा' व्यक्त की, खासकर यूक्रेन युद्ध को देखते हुए।

तेल का छेड़ा जिक्र

बेसेंट ने इंटरव्यू में तेल का भी जिक्र छेड़ा। उन्होंने कहा, 'हमने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25% टैरिफ लगाया है। अंदाजा लगाइए क्या हुआ? पिछले हफ्ते, यूरोपीय देशों ने भारत के साथ एक व्यापार समझौता कर लिया।' बेसेंट ने कहा, 'यूरोपीय देश यूक्रेन-रूस युद्ध के मोर्चे पर हैं। भारत ने प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल खरीदना शुरू किया। वहीं यूरोपीय देशों ने बाद में उसी तेल से बने प्रोडक्ट खरीदे। ऐसे में यूरोपीय देश खुद के खिलाफ हो रहे युद्ध को फंड दे रहे थे।'

अमेरिका का नहीं दिया साथ

बेसेंट ने कहा, 'यूरोपीय देश हमारे साथ जुड़ने को तैयार नहीं थे और पता चला कि वे यह व्यापार समझौता करना चाहते थे।' उन्होंने कहा, 'जब भी आप किसी यूरोपीय को यूक्रेनी लोगों के महत्व के बारे में बात करते हुए सुनें, तो याद रखें कि उन्होंने यूक्रेनी लोगों से ऊपर व्यापार को रखा। यूरोपीय व्यापार, यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।'

20 साल पहले शुरू हुई थी बातचीत

बेसेंट का यह बयान भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग 20 साल से चल रही बातचीत के बाद एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बनने के एक दिन बाद आया है। भारतीय अधिकारियों ने इस समझौते को 'सभी समझौतों का बाप' बताया है। यह भारत का 19वां व्यापार समझौता है।इस समझौते से 27 देशों वाले यूरोपीय संघ (EU) ब्लॉक को भारत के निर्यात में वृद्धि होने की उम्मीद है और यह कई घरेलू उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धा को बदल देगा। यह डील ऐसे समय हुई है जब अमेरिका का हाई टैरिफ, सप्लाई चेन में रुकावट, और रूस-यूक्रेन युद्ध सहित चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक व्यापार दबाव में है।

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