25 कमरों का बंगला, 7 विदेशी गाड़ियां, जिस सुपरस्टार की रईसी से चौंधिया जाती थी आंख, उसने चॉल में था तोड़ा दम
Updated on
06-06-2025 03:01 PM
पचास के दशक में भारतीय सिनेमा में एक ऐसा सितारा चमका, जिसने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं, और खूब दौलत-शोहरत कमाई। इस एक्टर के पास उस दौर में आलीशान और लग्जरी बंगला था। सात महंगी और इम्पोर्टेड कारें थीं। जिस बंगले में यह एक्टर रहता था, उसमें 25 कमरे थे। पर एक दिन स्टारडम और चमक की चादर ऐसी उतरी कि यह एक्टर पाई-पाई के लिए मोहताज हो गया। अपने आखिरी दिनों में इसे चॉल में रहना पड़ा और गरीबी में ही दम तोड़ दिया।
यह एक्टर अपने जमाने का मशहूर कॉमेडियन और डायरेक्टर भी रहा। अपने करियर में इसने 300 फिल्मों में काम किया, जिनके कई गाने भी हिट रहे थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि फिल्मों में बॉडी डबल के बिना स्टंट करने की शुरुआत इसी एक्टर ने की थी। सेट पर हर दिन नई लग्जरी गाड़ी से जाता था। पर हालात ऐसे बने कि लग्जरी गाड़ियों से लेकर घर-बंगला तक सब बिक गया।
भगवान दादा ने एक इंटरव्यू में बताई थी लुटे स्टारडम की कहानी
यह थे भगवान दादा, जिनके एक थप्पड़ ने एक्ट्रेस ललिता पवार का चेहरा बिगाड़ दिया था, और आंख खराब कर दी थी। भगवान दादा ने खुद एक इंटरव्यू में अपने लुटे स्टारडम और गरीबी पर बात की थी। उन्होंने 'द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया' से कहा था, 'फिल्म 'अलबेला' की सफलता के बाद मैं लखपति बन गया था। मेरे पास एक स्टूडियो था। मैंने सात लग्जरी गाड़ियां खरीदी थीं, ताकि हफ्ते में हर दिन नई गाड़ी से जाया करूं।'
'औरतें मेरी कमजोरी थीं, पत्नी के प्रति बेवफा था'
भगवान दादा ने आगे कहा था, 'मेरे पास जुहू में 25 कमरों का एक बंगला था। लेकिन भगवान ने मुझे मेरे बुरे कर्मों का फल दिया और सबकुछ छीन लिया। मैं शराबी कबाबी बन गया। ताश और रेस कोर्स में जुआ खेलने लगा। शराब और औरतें मेरी कमजोरी थी। मैं अपनी पत्नी के प्रति बेवफा था। सच तो यह है कि मैंने अपने परिवार को नजरअंदाज़ कर दिया था। शायद यह मुझे सजा देने का भगवान का तरीका था। मैं एक मजदूर करोड़पति से कंगाल बन गया।'
भगवान दादा का असली नाम, चौथी क्लास में छूट गई थी पढ़ाई
भगवान दादा आखिरी दिनों में एक चॉल में रहने लगे थे। उनका असली नाम भगवान अबाजी पांडव था, और वह एक कपड़ा मिल वर्कर के बेटे थे। फिल्मों में आने से पहले खुद भगवान दादा भी कपड़ों की मिल में ही काम करते थे। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, तो भगवान दादा को चौथी क्लास के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। लेकिन जब फिल्मों में आए, तो अपार दौलत कमाई।
बेचना पड़ा बंगला-गाड़ियां, गरीबी और चॉल में दर्दनाक मौत
लेकिन एक फिल्म बनाने के चक्कर में सब गंवा बैठे। भगवान दादा ने फिल्म 'हंसते रहना' बनाई थी, जिसमें किशोर कुमारको साइन किया था। लेकिन किशोर कुमार के कारण उन्हें फिल्म बीच में ही बंद करनी पड़ गई, जिससे उन्हें काफी नुकसान हुआ। इसकी भरपाई के लिए भगवान दादा को अपना बंगला और गाड़ियां तक बेचनी पड़ीं। नतीजा यह हुआ कि भगवान दादा आर्थिक तंगी का शिकार हो गए। इतनी गरीबी आ गई कि चॉल में रहना पड़ा। पाई-पाई को मोहताज थे। इसके कारण उन्होंने खुद को शराब में डुबो लिया और फिर 4 फरवरी 2002 को उनका हार्ट अटैक से निधन हो गया।
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