
देवी धाम सलकनपुर से 6 महीने के बच्चे का मुंडन और तुलादान कराकर लौट रहे भोपाल के परिवार की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। भैरव घाटी पर हुए हादसे में दादा-दादी समेत परिवार के 5 लोगों समेत ड्राइवर की मौत हो गई। पोते समेत 6 लोग घायल हैं। बच्चा वेंटिलेटर पर है। उसे रेनबो हॉस्पिटल, भोपाल में भर्ती कराया गया है।
भोपाल में डीआईजी बंगला इलाके के चौकसे नगर के रहने वाले राजेंद्र पांडेय (75) का परिवार आइसक्रीम कारोबारी हैं। शुक्रवार को उनके 6 महीने के पोते व्योम का मुंडन कराने के लिए परिवार के 10 लोग टवेरा कार से सलकनपुर गए थे।
शुक्रवार शाम 6.20 बजे भैरव घाटी पर कार रेलिंग की दीवार से टकराकर पलट गई। टवेरा में पीछे बैठे बच्चे के पिता मोहित पांडेय ने बताया कि ड्राइवर घाटी के मोड़ पर गाड़ी मोड़ नहीं पाया। गाड़ी सीधे रेलिंग की दीवार से टकरा गई।
पीएम रूम तक परिजन ने धकेला स्ट्रेचर
शारदा प्रसाद, राजेंद्र और ड्राइवर लक्ष्मी नारायण के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए रेहटी लाया गया। शारदा, उषा और पुष्पलता के शव नर्मदापुरम जिला अस्पताल लाए गए। तीनों महिलाओं के शव जिला अस्पताल परिसर से पोस्टमॉर्टम रूम तक ले जाने के लिए परिजन को ही स्ट्रेचर धकेलना पड़ा। वार्ड बॉय नहीं मिला।
हम बेहद खुश थे, तुलादान में खूब नाचे...
हमारा पूरा परिवार मेरे 6 महीने के बेटे व्योम का मुंडन कराने शुक्रवार को भोपाल से सलकनपुर गया था। सभी बेहद खुश थे। नर्मदा दर्शन किए। रामजी बाबा की समाधि पर मुंडन कराया। सब बच्चे के तुलादान में खूब नाचे। इसके बाद देवी धाम सलकनपुर पहुंचे। मातारानी की पूजा और दर्शन किए। शाम 6.20 बजे जब सलकनपुर से भोपाल के लिए निकले तो भैरव घाटी के पास कार (एमपी 04 टीए 6799) अनियंत्रित होकर पहाड़ी की रेलिंग की दीवार से टकराकर पलट गई।
मैं पीछे बैठा था। अचानक मोड़ आ गया, ड्राइवर पूरी गाड़ी काट नहीं पाया। टवेरा सीधे रेलिंग से टकरा गई। जोर से आवाज आई और हम सुध-बुध खो रहे थे। महिलाएं चीख-पुकार रहीं थी। मेरे पिता राजेंद्र पांडेय, ताऊ शारदा प्रसाद की मौके पर ही मौत हो गई। हाउसिंग बोर्ड भोपाल से हमारे साथ किराए की गाड़ी लेकर आया ड्राइवर लक्ष्मीनारायण घायल था। उसे और परिवार के बाकी लोगों को पुलिस और दूसरे लोग अस्पताल लेकर गए।
राम - लक्ष्मण की तरह थे दोनों भाई
शारदा और राजेंद्र की बहन कृष्णा दीक्षित ने कहा, 'दोनों भाई राम - लक्ष्मण की तरह थे। परिवार में सबसे बड़े शारदा पांडेय जैसा कहते थे, वैसा होता था। आज के जमाने में भी हमारी 22 लोगों की फैमिली साथ रहती है। भाभी अपर्णा और उषा में जेठानी-देवरानी का रिश्ता होने के बावजूद बहनों की तरह रहती थीं। बड़े भाई अगर कोई कपड़ा भी खरीदकर लाते थे तो छोटे भाई उसे अपना लेते थे। मना नहीं करते थे कि नहीं पहनना।'