
राजधानी रांची के लगभग 15 किमी दूर बिरसा जैविक उद्यान में बाघिन के चार नवजात बच्चों की मौत हो गई है। जिस बाघिन के नवजात की मौत हुई है उसका नाम गौरी है। बिरसा जैविक उद्यान प्रबंधन के मुताबिक नवजातों की मौत अपनी मां के शरीर से दब जाने की वजह से हुई है। बच्चे मां के बेहद करीब चले गए थे।
बता दें कि बाघिन गौरी ने 10 मई की आधी रात के करीब चार बच्चों को जन्म दिया था। बताया जा रहा है कि बाघिन की सीसीटीवी से मॉनिटरिंग भी की जा रही थी। इसके बाद भी ऐसी घटना हो जाना प्रबंधन पर सवाल खड़े कर रही है।
मॉनिटरिंग के बाद भी बच्चों को नहीं बचाया जा सका
बाघिन गौरी के प्रसव होने की जानकारी प्रबंधन को थी। इसके बाद से जिस केज में वह थी, वहां लगाए गए सीसीटीवी कैमरे से मॉनिटरिंग भी की जा रही थी। बिरसा जैविक उद्यान प्रबंधन की मानें तो जन्म के बाद सभी नवजात मां के काफी करीब आ गए। वहीं जब मां ने करवट बदली तो सभी नवजात उसमें दब गए।
जब प्रबंधन को इस बात का पता चला तो वहां के कर्मी केज के भीतर जा कर देखा। बाघिन को बच्चों से दूर हटाया गया। तीन बच्चों की वहीं मौत हो चुकी थी, लेकिन एक बच्चे की सांस चल रही थी पर उसे भी जब तक संभाला जाता तब तक मौत हो चुकी थी।
डॉक्टर बोले- दम घुटने से सभी की मौत हुई
बिरसा जू के चिकित्सक डॉ. ओपी साहू ने बताया कि बाघिन गौरी ने पहली बार बच्चों को जन्म दिया था। उसने 10 मई की रात दो बजे पहले बच्चे को जन्म दिया और फिर सभी बच्चे 11 मई को मां के पेट से बाहर आए। सभी बच्चे सामान्य और स्वस्थ थे। एक बच्चे का वजन एक किलो था जबकि अन्य तीन का वजन 900 से 950 ग्राम के बीच था।
सामान्य तौर पर मां अपने बच्चे का केयर खुद करती है। विषम स्थिति में ही बाहरी सपोर्ट दिया जाता है। 11 मई के पूरे दिन तक सब सामान्य था। चूंकि बाघ के बच्चे की आंख जन्म के 15वें दिन खुलती है। ऐसे में इन दिनों तक मां खुद केयर करती है। वह खुद ही दूध पिलाती है।
गौरी ने पहली बार बच्चों को जन्म दिया था। 11 मई की रात बाघिन अपने बच्चों पर ही लेट गई जिस वजह से दम घुटने से मौत हो गई। जब जानकारी मिली तो एक बच्चे को निकाला गया। उसे दूध पिलाने की कोशिश की गई पर इंटरनल हेंम्रेजेज होने की वजह से मौत हो गई। फिर पोस्टमॉर्टम के बाद 12 मई को जू के भीतर बने दाहगृह में शवों को जलाया गया। सूत्रों की मानें तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत होने की बात सामने आई है।
पहली बार गर्भवती हुई थी बाघिन गौरी
जिस बाघिन गौरी के बच्चों की मौत हुई है, उसे छह साल पहले 2018 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर चिड़ियाघर से लाया गया था। बिरसा जू में बाघों की संख्या में बढ़ोत्तरी की पहल के तहत इसे लाया गया था। वह पहली बार गर्भवती हुई थी। उसने पूरे 105 दिन के गर्भावस्था के पीरियड को पूरा करने के बाद बच्चों को जन्म दिया था।
फिलवक्त बिरसा जू में छह बाघिन है। जिसमें गौरी सहित अनुष्का, लक्ष्मी, कावेरी, कृष्णा और ताप्शी हैं। जबकि दो बाघ भी हैं। उनका नाम जावा और मलिक है।