सेंट्रल-यूनिवर्सिटी को वेतन भुगतान करने 15 दिन का अल्टीमेटम

Updated on 11-05-2026 06:12 PM
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दैनिक वेतनभागी कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन भुगतान को लेकर सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों को नियमित पद के अनुसार वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कर्मचारियों को न तो नियमित किया गया है और न ही देयकों का भुगतान किया गया है। जिसके खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी और रिव्यू खारिज फिर भी नहीं दिया वेतन

इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील ने कहा कि, साल 2023 में पारित आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय अब तक कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी का पूरा लाभ नहीं दे रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि हाईकोर्ट ने 6 मार्च 2023 को पारित आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि, कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी माना जाएगा और उनकी सेवाओं का नियमितीकरण 26 अगस्त 2008 से प्रभावी माना जाएगा। साथ ही उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह सभी लाभ दिए जाने थे।

यह भी बताया गया कि, विश्वविद्यालय की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) और पुनर्विचार याचिका भी सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया द्वारा खारिज की जा चुकी है, इसके बावजूद आदेश का पूर्ण पालन नहीं किया गया है।

यूनिवर्सिटी का जवाब- दस्तावेज नहीं मिलने से हो रही देरी

मामले में विश्वविद्यालय की ओर से वकील ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारियों का नियमितीकरण कर दिया गया है, लेकिन कुछ दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया बाकी है। विश्वविद्यालय ने दावा किया कि कर्मचारियों से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन वे उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे लाभ देने में देरी हो रही है।

इसके जवाब में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने कहा कि संबंधित आदेश और पत्राचार कर्मचारियों को उपलब्ध ही नहीं कराया गया था।

12 मई तक पत्र देने, फिर एक सप्ताह में दस्तावेज जमा करने के निर्देश

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि 27 अप्रैल 2026 का पत्राचार 12 मई तक सभी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद कर्मचारियों को एक सप्ताह के भीतर जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय भले नियमितीकरण का दावा कर रहा हो, लेकिन अब तक कर्मचारियों को नियमित पद का वेतन नहीं दिया जा रहा है। इस पर विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी कर ली जाएगी और जो कर्मचारी नियमित पद पर कार्यरत हैं, उन्हें नियमित पद के अनुसार वेतन दिया जाएगा।

हाईकोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट किया कि नियमित कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे याचिकाकर्ताओं को 15 दिनों के भीतर नियमित पद का वेतन भुगतान किया जाए।

19 जून को फिर होगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 जून 2026 को निर्धारित की है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय ने आदेश का पालन किया या नहीं। यह मामला विश्वविद्यालय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



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